तखतगढ़ में आधी रात पार्षदों की बाड़ेबंदी में पुलिस का दखल, सियासी गलियारों में मचा हड़कंप
तखतगढ़ में पार्षदों की बाड़ेबंदी के दौरान पुलिस की आधी रात की कार्रवाई का वीडियो वायरल होने से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

तखतगढ़। तखतगढ़ की राजनीति में नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव के बाद एक नया विवाद गहरा गया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि आधी रात को पुलिस की एक टीम उस स्थान पर पहुंची जहां कांग्रेस प्रत्याशी सरोज मेवाड़ा और अन्य पार्षद बाड़ेबंदी में ठहरे हुए थे। यह घटनाक्रम क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह घटना सिरोही जिले के पौसालिया स्थित सुखधाम की है। कांग्रेस पार्षद अनराज मेवाड़ा ने आरोप लगाया है कि तखतगढ़ पुलिस ने पाली जिले की सीमा लांघकर वहां पहुंचकर निर्वाचित प्रतिनिधियों को नींद से जगाया और उनसे पूछताछ की। पार्टी का आरोप है कि यह कार्रवाई पार्षदों पर दबाव बनाने और उन्हें डराने के उद्देश्य से की गई थी। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वायरल वीडियो के सामने आने के बाद तखतगढ़ का सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि क्या पुलिस के पास इस तरह की कार्रवाई के लिए कोई ठोस कानूनी आधार था और क्या इस पूरी प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया। स्थानीय राजनीति में इस तरह के हस्तक्षेप को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है, जिससे चुनावी माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है।
इस पूरे मामले पर तखतगढ़ थाना प्रभारी शैतानसिंह ने अनभिज्ञता जाहिर की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उन्हें इस वायरल वीडियो और वहां हुई कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी नहीं है। पुलिस की ओर से कोई स्पष्टीकरण न आने के कारण यह अभी भी रहस्य बना हुआ है कि टीम वहां किस सूचना के आधार पर पहुंची थी और उनका वास्तविक उद्देश्य क्या था।
राजस्थान के विभिन्न निकायों में चुनाव के दौरान बाड़ेबंदी और पुलिस की भूमिका को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं। तखतगढ़ का यह मामला अब एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पुलिस प्रशासन इस मामले की कोई आधिकारिक जांच करेगा या संबंधित पक्षों को इस घटना का कोई ठोस जवाब मिलेगा।
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