कोटा। दीपावली के पावन पर्व पर कोटा शहर पुलिस ने संवेदनशीलता और अपनत्व की एक अनूठी मिसाल पेश की है। पुलिस बल ने गंगा विजन गृह में रहने वाले बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के साथ दीपावली का स्नेह मिलन कार्यक्रम आयोजित कर खुशियां साझा कीं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग को उत्सव की मुख्यधारा से जोड़ना और बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाना था।
कार्यक्रम में कोटा शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने बच्चों के साथ समय बिताया और उन्हें उपहार भेंट किए। इस दौरान गंगा विजन गृह का वातावरण बच्चों की खिलखिलाहट और उत्साह से सराबोर रहा। पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति ने बच्चों को न केवल सुरक्षा का अहसास कराया, बल्कि उन्हें यह भी महसूस कराया कि वे समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इस आयोजन की सबसे खास बात बच्चों द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए मिट्टी के दीपों की खरीद रही। पुलिस अधीक्षक ने स्वयं इन दीपों को खरीदा, जिससे बच्चों के हुनर को न केवल पहचान मिली, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा। ये दीपक अब केवल घरों में ही नहीं, बल्कि कोटा के विभिन्न पुलिस कार्यालयों को भी रोशन करेंगे, जो इस पहल की सार्थकता को दर्शाता है।
पुलिस विभाग की इस संवेदनशीलता की चारों ओर सराहना हो रही है। यह कदम दर्शाता है कि पुलिस का कार्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी मानवीय जिम्मेदारियों को निभाना भी है। बच्चों द्वारा बनाए गए दीपों का उपयोग करना उनके कठिन परिश्रम के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक तरीका है।
इस स्नेह मिलन ने यह संदेश दिया कि दीपावली का असली अर्थ रोशनी के साथ-साथ दूसरों के जीवन में खुशियां बांटना भी है। कोटा पुलिस की इस पहल ने न केवल बच्चों का उत्साहवर्धन किया, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी दिया है कि हम सभी मिलकर एक समावेशी समाज का निर्माण कर सकते हैं।


