Success story: हरियाणा के जींद जिले के छोटे से गांव खरकरामजी से एसडीएम बनने तक का सफर तय करने वाली अन्नू कटारिया आज पूरे प्रदेश के ग्रामीण अंचल की बेटियों के लिए एक मिसाल बन चुकी है। हर किसी के लिए सफलता का मतलब अलग होता है। लेकिन सफलता का मतलब हकीकत में क्या होता है, यह साबित किया है, जींद जिले के खरकरामजी गांव की बेटी अन्नू कटारिया ने। अन्नू कटारिया को लगातार असफलताएं मिली, लेकिन सफलता के जुनून ने उनको हमेशा ही प्रेरित किया। इसी का परिणाम है कि अब वे 95वीं रैंक लेकर एसडीएम बन गई हैं।
अन्नू कटारिया ने हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा में 95वीं रैंक हासिल कर पूरे क्षेत्र का मान बढ़ा दिया है। छोटे से गांव से निकल कर अन्नू कटारिया ने हरियाणा भर में अपना नाम चमका दिया है। इस सफलता से पहले उनके जीवन में असफलताओं को लंबा दौर रहा है। साथ ही समाज से मिले ताने, अन्नू को कमजोर करने की बजाय आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे।
बेशक हरियाणा लोक सेवा आयोग की एचसीएस की परीक्षा के दूसरे ही प्रयास में वे सफल हो गई, लेकिन जीवन में असफलताएं बहुत रही हैं। क्योंकि अन्नू कटारिया को एचपीएससी सहित अलग-अलग 7 सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता झलेनी पड़ी। इसके बावजूद हार मानने की बजाय वे आगे बढ़ती रहीं।
गांव में की शुरूआती पढ़ाई
अन्नू कटारिया ने अपनी 10वीं तक की पढ़ाई गांव के ही स्कूल से की है। अपने परिवार के साथ वे जींद जिले के खरकरामजी गांव की रहती थी। अन्नू के पिता रघुवीर कटारिया हमेशा ही बेटी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। 12वीं कक्षा में उन्होंने टॉप किया और इसके बाद चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय से मेडिकल साइंस में बीएससी की। इसके बाद जूलॉजी में एमएससी करने के बाद निजी संस्थान में अध्यापिका भी रही। अनु कटारिया का अपनी मेहनत के बल पर एसडीएम बनने तक का सफर आज लाखों ग्रामीण अंचल की बेटियों को प्रेरणा दे रहा है।


