Sugar Stock update: देश में शकर की उपलब्धता का समीकरण इस बार केवल सरकारी बीक्री कोटे पर निर्भर नहीं रहेगा, क्योंकि नवंबर के पहले पखवाड़े के लिए खाद्य मंत्रालय ने 587 मिलों को 13 लाख मीट्रिक टन शकर का आवंटन किया है। गौरतलब है कि अक्टूबर में पूरे महीने के लिए 30 लाख टन का कोटा जारी हुआ था। इसके बावजूद फिलहाल घरेलू बाजार में आपूर्ति को पुराने भंडार और नई पेराई से सहारा मिल रहा है। चिंता आगामी महीनों को लेकर है।
मौजूदा सत्र में शकर का उत्पादन घरेलू मांग और खपत से कम रहने की आशंका है। ऐसे में त्योहारों के बाद शुरू होने वाली सामान्य मांग और फरवरी मार्च तक चलने वाले लग्नसरा के सीजन के बीच उपलब्धता पर दबाव बन सकता है। इंदौर के थोक बाजार फिलहाल शकर 53 से 54 रुपए प्रति किलो बिक रही है। आगे बाजार की दिशा सरकारी आवंटन के साथ मिलों के उत्पादन और बिक्री पर भी निर्भर करेगी।
बता दें कि 25 अक्टूबर तक देश में करीब 4 लाख टन शकर का उत्पादन हो चुका था और 107 मिलों में पेराई शुरू हो गई थी। वहीं पिछले सत्र के अंत में करीब 36 लाख टन का बचा हुआ भडार भी उपलब्ध था। यही भंडार उत्पादन में कमी के बावजूद अब तक घरेलू आपूर्ति बनाए रखने में सहायक रहा है।
आयात पर भी सरकार ने बढ़ाई निगरानी
चीनी के उत्पादन और खपत के बीच संभावित अंतर को देखते हुए मंत्रालय ने मिलों से हर महीने उत्पादन के आंकड़े मांगे हैं। सरकार द्वारा जरूरत पड़ने पर विदेश से कच्ची शकर के आयात की अनुमति देने पर भी निर्णय लिया जा सकता है। फिलहाल देश में चीनी की लागत को देखते हुए विदेशों से सीमित मात्रा में कच्ची शकर मंगाई जा रही है।
कोटे में कमी बरकरार, लेकिन आपूर्ति के दूसरे स्रोत मौजूद
जानकारी के अनुसार देश में चीनी का नवंबर के पहले पखवाड़े का 13 लाख टन आवंटन अक्टूबर के पहले पखवाड़े के 14 लाख टन से 1 लाख टन कम हुआ है। गौरतलब है कि सितंबर के पहले पखवाड़े में भी इतना ही कोटा दिया गया था। वहीं अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में 16 लाख टन आवंटन हुआ था। हालांकि, अक्टूबर में पेराइ शुरू करने वाली मिलो को उस महीने उत्पादित शकर नवंबर में बेचने की अनुमति दी गई है। इससे नवंबर में नियमित कोटे के अलावा भी बाजार में शकर पहुचने का अनुमान है। सरकार द्वारा चीनी की मांग की पूर्ति करने हेतु नवंबर महीने में पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।


