सवाई माधोपुर। सवाई माधोपुर की सड़कों को धूलमुक्त और स्वच्छ बनाने के दावों के बीच नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर की सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2021-22 में करीब 80 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च कर खरीदी गई अत्याधुनिक रोड स्वीपिंग मशीन आज नगर परिषद परिसर में धूल फांक रही है। जिस मशीन से शहर की सड़कों की सूरत बदलने की उम्मीद थी, उसका इस तरह लंबे समय से अनुपयोगी पड़े रहना सरकारी संसाधनों के रखरखाव और प्रबंधन पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
नगर परिषद का लक्ष्य इस मशीन के माध्यम से प्रमुख सड़कों की सफाई को प्रभावी बनाना था, ताकि सफाई कर्मचारियों पर काम का बोझ कम हो और शहर में स्वच्छता का स्तर बेहतर हो सके। योजना के अनुसार, यह मशीन धूल-मिट्टी को हटाने में सक्षम थी, जिससे शहरवासियों को एक साफ-सुथरा वातावरण मिलता। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि मशीन का उपयोग करने के बजाय उसे परिषद के प्रांगण में लावारिस छोड़ दिया गया है। जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से खरीदी गई इस मशीन का उपयोग न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मशीन कब से बंद पड़ी है और इसके संचालन में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं। यदि मशीन में कोई तकनीकी खराबी है, तो उसे ठीक कराने में इतनी देरी क्यों की जा रही है? इन सवालों का जवाब देने के लिए नगर परिषद प्रशासन को आगे आना होगा। संसाधनों की अनदेखी न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि यह शहर की सफाई व्यवस्था के प्रति परिषद की उदासीनता को भी उजागर करती है।
नगर परिषद की जिम्मेदारी केवल उपकरण खरीदना नहीं, बल्कि उनका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना भी है। शहरवासी अब यह मांग कर रहे हैं कि प्रशासन इस मशीन की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करे और इसे जल्द से जल्द सड़कों पर उतारने के लिए ठोस कदम उठाए। सरकारी खजाने से खर्च की गई राशि का वास्तविक लाभ जनता को मिलना चाहिए, न कि यह मशीन केवल परिसर की शोभा बढ़ाने के लिए रह जाए। समय रहते यदि इस दिशा में सुधार नहीं किया गया, तो यह प्रशासनिक विफलता का एक बड़ा उदाहरण बन जाएगा।
