राजस्थान के किसानों का सीताफल अब औने-पौने दामों पर नहीं बिकेगा। राजस्थान के किसानों की सीताफल को अब प्रोसेस किया जाएगा और उससे उत्पाद बनाकर उसको मार्केट में बेचा जाएगा। इसके लिए राजस्थान के चितौड़गढ मेवाड़ के उत्कृष्टता केंद्र में प्रदेश की पहली सीताफल प्रसंस्करण यूनिट लगाई जाएगी। इस यूनिट को बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है।
पांच हजार वर्ग मीटर में बनने वाली इस यूनिट में मेवाड़ में उत्पादन होने वाले सीताफल की खरीदी जाएगी। इससे किसानों को उनकी सीताफल का उचित भाव मिल सकेगा। ऐसे में सीताफल की खेती को भी बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। फिलहाल किसानों को उचित मार्केट नहीं मिलने के कारण उनकी फसल का उचित भाव नहीं मिल पाता था, लेकिन अब किसानों की यह चिंता दूर होने वाली है।
परियोजना पर खर्च होंगे 2.30 करोड़ रुपए खर्च
राजस्थान के मेवाड़ में सीताफल की प्रोसेसिंग यूनिट का निर्माण राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड, खंड भीलवाड़ा के माध्यम से किया जा रहा है। इस यूनिट को पांच हजार वर्ग मीटर में लगाया जाएगा। इसके लिए 2.30 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें निर्माण पर 1.25 करोड़, मशीनरी पर 75 लाख और किसानों के प्रशिक्षण व पौध संरक्षण के लिए 1008 वर्ग मीटर में शेडनेट हाउस बनाने पर 30 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। निर्माण मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
पल्प निकालकर होगी पैकिंग
राजस्थान में लगने वाली पहली सीताफल प्रोसेसिंग यूनिट में काम आधुनिक तरीके से होगा। इसके लिए यूनिट के हॉल को चार हिस्सों में बांटा जाएगा। पहले हिस्से में सीताफल का भंडारण, दूसरे में धुलाई और सुखाने, तीसरे में पल्प निकालने तथा चौथे में उसकी पैकिंग की जाएगी। तैयार पल्प को माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे उसे लंबे समय तक उपयोग में लिया जा सकेगा।


