Rajasthan Land Conversion Rules : राजस्थान में कृषि योग्य भूमि पर अब मकान व दुकान बनाना महंगा पड़ने वाला है। कृषि भूमि पर मकान, दुकान, उद्योग या अन्य गैर-कृषि काम करने के नियमों को सरल किया है, लेकिन अगर फिर भी नियमों की अनदेखी करते है और बिना अनुमति के निर्माण करते है तो प्रीमियम का चार गुना जुर्माना वसूला जाएगा। इसके लिए पटवारी की स्पेशल ड्यूटी रहेगी और साल में वह दो बार सर्वे करके इसकी रिपोर्ट देंगे।
हालांकि राजस्थान सरकार ने जमीन के रूपांतरण की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दिया है और इसके नियम निर्धारित कर दिए हैं। राजस्थान भू-राजस्व ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि का गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग नियम-2026 बनाया गया है। यह नियम 2 नवंबर से पूरे राजस्थान में लागू हो जाएगा। इसके बाद पुराने नियम समाप्त हो जाएंगे और नए नियम लागू हो जाएंगे।
14 तरह के कामों के लिए सरकार ने दी अनुमति
राजस्थान सरकार ने जमीन के रूपांतरण के नए नियमों को निर्धारित किया गया है। इसके तहत कृषि भूमि को आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, संस्थागत, पर्यटन, चिकित्सा, खेल परिसर, खाद्य प्रसंस्करण और नवीकरणीय ऊर्जा सहित 14 तरह के कामों को सरकार द्वारा मंजूरी दी गई है।
इन कामों के लिए आनलाइन करना होगा और इसके प्रीमियम की गणना भी आनलाइन की जाएगी। जहां पर आवेदन के साथ प्रीमियम की राशि भी जमा करवानी होगी। आवासीय उपयोग के लिए 2000 रुपए और अन्य प्रयोजनों के लिए 20 हजार रुपए आवेदन शुल्क देना होगा। यह शुल्क वापस नहीं मिलेगा।
बिना अनुमित उपयोग किया तो चार गुना लगेगा जुर्माना
राजस्थान सरकार ने जमीन के रूपांतरण में नियमों का अनदेखा करने के सख्त रुख अपनाया जाएगा। गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेजों से अनुमति लेने पर आदेश निरस्त किया जा सकेगा और प्रीमियम का दोगुना जुर्माना लगेगा। बिना अनुमति कृषि भूमि का गैर-कृषि उपयोग करने पर निर्धारित प्रीमियम का चार गुना जुर्माना देना होगा। इसकी निगरानी के लिए पटवारी साल में कम से कम दो बार सर्वे कर रिपोर्ट देगा। अनुमति आदेश से असंतुष्ट व्यक्ति 30 दिन के भीतर जिला कलक्टर के समक्ष अपील कर सकेगा।
रूपांतरण के बाद भी निर्माण की मंजूरी जरूरी
जमीन का रूपांतरण होने का मतलब यह नहीं है कि उस पर सीधे निर्माण शुरू किया जा सकता है। इसके लिए ले-आउट और भवन निर्माण की अलग मंजूरी लेनी होगी। परियोजना तक कम से कम 30 फुट चौड़ा रास्ता होना जरूरी है। निर्धारित भूखंडों में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था करनी होगी।
500 वर्गमीटर या इससे अधिक क्षेत्रफल वाले मामलों में भवन मानचित्र की स्वीकृति भी अनिवार्य होगी। नदी-नालों, तालाबों, जलस्रोतों, सार्वजनिक रास्तों, श्मशान, कब्रिस्तान, अवाप्त की जा रही जमीन और पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों में रूपांतरण की अनुमति नहीं मिलेगी।
इतना लगेगा प्रीमियम
आवासीय उपयोगः डीएलसी दर का 5 प्रतिशत ।
व्यावसायिक व अन्य संबंधित उपयोगः 10 प्रतिशत।
नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाः 0.5 प्रतिशत।
खाद्य प्रसंस्करण इकाई: 2.5 प्रतिशत
खातेदार को अधिकतम 500 वर्गमीटर जमीन पर अपना मकान या पशुशाला बनाने के लिए प्रीमियम नहीं देना होगा। कुछ पात्र परियोजनाओं और औद्योगिक इकाइयों को भी नियमानुसार छूट मिलेगी।