जोधपुर में लोगों की प्यास बुझाने के लिए ही पानी का इंतजाम चुनौती बना हुआ है। शहर को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए राजीव गांधी लिफ्ट केनाल के तीसरे चरण से 100 क्यूसेक अतिरिक्त पानी मिलने की उम्मीद है। यह पानी भी शहर और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रस्तावित है।
ऐसे में पाली के रोहट में विकसित हो रहे जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र (जेपीएनआइए) में हजारों करोड़ के औद्योगिक निवेश और नई इकाइयों के लिए पानी कहां से आएगा, यह बड़ा सवाल है। खास बात यह है कि औद्योगिक टाउनशिप में जलापूर्ति व्यवस्था, बिजली और गैस जैसी सुविधाओं के लिए 400 करोड़ रुपए का बजट है। लेकिन कोई स्थाई स्रोत नहीं। पानी की उपलब्धता को लेकर सवालों के बीच औद्योगिक क्षेत्र के विकास को गति देने की तैयारियां जारी हैं।
दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआइसी) के तहत विकसित हो रही इस टाउनशिप के लिए रेलवे साइडिंग को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। रोहट रेलवे स्टेशन से प्रस्तावित मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब तक रेलवे लाइन बिछाने की योजना है। इससे औद्योगिक इकाइयों को माल परिवहन में सुविधा मिलेगी। औद्योगिक टाउनशिप के प्रथम चरण में 30 भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू की गई है। इनमें 28 औद्योगिक और दो मोटल-रेस्टोरेंट के लिए हैं। भूखंडों की आधार दर 4 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर रखी गई है। आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित की गई है।
सुविधाओं पर 400 करोड़ का प्रस्ताव
औद्योगिक इकाइयों के लिए जल और विद्युत आपूर्ति की आधारभूत सुविधाएं विकसित करने पर करीब 400 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना है। इसमें 220 केवी डबल सर्किट विद्युत लाइन भी शामिल है। इसके अलावा गैस टर्मिनल और सीएनजी स्टेशन के लिए भी जमीन आवंटित करने की मंजूरी दी गई है। पानी जोधपुर के कुड़ी हौद से भेजा जाना प्रस्तावित है।
रीसाइक्लिंग व फार्मा के अलग-अलग सेक्टर
फेज-1 के संशोधित लेआउट में टैक्सटाइल, फार्मा, वेस्ट रीसाइक्लिग, एग्रो प्रोसेसिंग और सामान्य उद्योगों के लिए अलग-अलग सेक्टर आधारित पार्क विकसित किए जाएंगे। वहीं, करीब 288 हेक्टेयर में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने की योजना है।
फैक्ट फाइल
1,578 एकड़ में फैला है।
922 करोड़ है प्रोजेक्ट लागत।
7,500 करोड़ का निवेश होगा।
40,000 से ज्यादा रोजगार का दावा।
40 एमएलडी से ज्यादा पानी चाहिए होगा।


