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सवाई माधोपुर में 2800 किलो मावा जब्त, व्यापारियों के नाम छिपाने पर उठे सवाल

त्योहारी सीजन में रेलवे स्टेशन पर भारी मात्रा में मावा पकड़ा गया, लेकिन विभाग द्वारा व्यापारियों की पहचान उजागर न करने से लोगों में नाराजगी है।

सवाई माधोपुर। दीपावली के त्योहार को देखते हुए सवाई माधोपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मंगलवार तड़के रेलवे स्टेशन पर आगरा से ट्रेन के जरिए पहुंची 2800 किलो मावे की खेप को टीम ने पकड़ा। यह मावा 70 टोकरियों में भरकर लाया गया था और इसे शहर तथा बजरिया के व्यापारियों तक पहुंचाया जाना था। विभाग ने सभी टोकरियों से नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए जयपुर स्थित प्रयोगशाला में भेज दिया है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद विभाग की कार्यशैली और पारदर्शिता पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी नीतेश गौतम के अनुसार, विभाग को सूचना मिली थी कि आगरा से भारी मात्रा में मावा आ रहा है। तड़के करीब 3:30 बजे टीम ने स्टेशन पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू की। पांच टोकरियों के मालिक मौके पर नहीं पहुंचे, जिसके बाद उन्हें सीज कर डीप फ्रीजर में रखवा दिया गया। विभाग का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल नमूने लेना ही काफी है, जबकि त्योहारी सीजन में मिलावट का खतरा सबसे अधिक होता है?

सबसे बड़ा विवाद व्यापारियों के नाम उजागर न करने को लेकर है। इतनी बड़ी मात्रा में मावा पकड़े जाने के बावजूद विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह खेप किन व्यापारियों की थी और इसे किन दुकानों पर सप्लाई किया जाना था। जनता और स्थानीय लोग अब यह पूछ रहे हैं कि विभाग संबंधित व्यापारियों के नाम बताने से क्यों बच रहा है। क्या इतनी बड़ी खेप के मामले में पारदर्शिता बरतना विभाग की जिम्मेदारी नहीं है? इसके अलावा, कार्रवाई सुबह हुई लेकिन मीडिया को इसकी जानकारी 10-12 घंटे बाद दी गई, जिससे विभाग की मंशा पर भी संदेह पैदा हो रहा है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल जेमिनी ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर त्योहारों के मद्देनजर खाद्य पदार्थों की जांच का अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन आमजन के मन में यह डर बना हुआ है कि जब तक जांच रिपोर्ट आएगी, तब तक बाजार में बाकी मावा बिक चुका होगा। यदि रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होती है, तो तब तक यह मावा न जाने कितने लोगों की सेहत बिगाड़ चुका होगा।

त्योहारों के समय खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका केवल नमूने लेने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। लोगों की मांग है कि संदिग्ध खाद्य पदार्थों की बिक्री पर तत्काल प्रभावी रोक लगाई जाए और मिलावटखोरों के नाम सार्वजनिक किए जाएं। केवल कागजी कार्रवाई से आमजन का भरोसा जीतना मुश्किल है। विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि दीपावली पर लोगों को शुद्ध और सुरक्षित मिठाइयां मिलें, न कि मिलावटी मावे से बनी सामग्री।

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