करौली जिला कारागृह का औचक निरीक्षण: बंदियों के साथ समानता और संतोषजनक व्यवस्थाओं की पुष्टि
करौली जिला कारागृह में विजिटर्स बोर्ड ने निरीक्षण कर बंदियों की सुविधाओं और उनके साथ किए जा रहे व्यवहार का जायजा लिया, जिसमें सभी व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं।
करौली। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत करौली जिला कारागृह में एक उच्च स्तरीय विजिटर्स बोर्ड ने संयुक्त निरीक्षण किया। जिला एवं सेशन न्यायाधीश की अध्यक्षता में हुई इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य जेल में बंद कैदियों के मानवाधिकारों की रक्षा और उन्हें मिल रही सुविधाओं की जमीनी हकीकत को परखना था। इस दौरान बोर्ड के सदस्यों ने जेल परिसर की साफ-सफाई और बंदियों के रहने के तौर-तरीकों का बारीकी से अवलोकन किया।
निरीक्षण के दौरान बोर्ड के सदस्यों ने बंदियों से व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से संवाद किया। इस बातचीत का केंद्र बिंदु यह जानना था कि क्या जेल में किसी भी प्रकार का जातिगत भेदभाव या अस्पृश्यता जैसी कुप्रथाएं तो नहीं हैं। साथ ही, दिव्यांग बंदियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और उन्हें मिल रही चिकित्सा सहायता के बारे में भी जानकारी जुटाई गई। बंदियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी भी स्तर पर भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ रहा है और सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं।
जेल की बैरकों और रसोई घर का निरीक्षण करने के बाद अधिकारियों ने वहां की स्वच्छता व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया। रिपोर्ट के अनुसार, बंदियों को बिना किसी भेदभाव के संयुक्त बैरकों में रखा जा रहा है, जो जेल प्रशासन की निष्पक्ष कार्यप्रणाली को दर्शाता है। चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी बंदियों की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सभी को सुलभता से मिल रहा है।
इस संयुक्त निरीक्षण में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और करौली वृत्ताधिकारी सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारी शामिल रहे। इसमें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी और जिला उद्योग एवं रोजगार अधिकारी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी विभागों के समन्वय से जेल की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर चर्चा की गई।
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