करौली नगर परिषद में 16.48 लाख के भुगतान फाइल में फर्जीवाड़े की आशंका, जांच शुरू
करौली नगर परिषद में 16.48 लाख रुपये की भुगतान फाइल में कथित फर्जी हस्ताक्षर का मामला सामने आया है। आयुक्त ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और विभागीय जांच टीम गठित की गई है।

करौली। करौली नगर परिषद में करीब 16 लाख 48 हजार रुपये के भुगतान से जुड़ी एक फाइल में कथित फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। यह प्रकरण तब प्रकाश में आया जब रुद्रा शहरी आजीविका सर्वांगीण विकास सहकारी समिति लिमिटेड से संबंधित भुगतान पत्रावली की जांच की गई। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर परिषद आयुक्त कालूराम ने 25 सितंबर को स्थानीय पुलिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
आयुक्त कालूराम ने बताया कि फाइल की जांच के दौरान तत्कालीन लेखा प्रभारी बृजभूषण शर्मा और तत्कालीन आयुक्त नरसी मीना के नाम से किए गए हस्ताक्षरों की सत्यता पर सवाल उठे थे। आईएफएमएस पोर्टल से प्राप्त वाउचरों के मिलान के बाद यह स्पष्ट हुआ कि दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई है। शिकायत में सहायक लेखाधिकारी महेंद्र गायरी और अभिषेक सिंह की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है। आरोप है कि भुगतान के लिए कूटरचित बिल और वाउचर तैयार किए गए थे और मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
प्रशासन ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पांच सदस्यीय विभागीय टीम का गठन किया है। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि संबंधित 16.48 लाख रुपये के बिल का भुगतान नहीं किया गया था, क्योंकि फाइल में गड़बड़ी मिलते ही उसे रिजेक्ट कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर प्रशासनिक चूक है और इसकी तह तक जाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
नगर परिषद प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच में जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पुलिस और विभागीय जांच टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम और इसमें शामिल लोगों की भूमिका पूरी तरह से स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, परिषद ने सभी संबंधित फाइलों की सुरक्षा और जांच प्रक्रिया को तेज कर दिया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
यह मामला नगर परिषद के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है। स्थानीय प्रशासन अब इस बात की भी समीक्षा कर रहा है कि क्या इसी तरह की अन्य फाइलों में भी कोई अनियमितता हुई है। जांच के परिणाम आने तक संबंधित कर्मचारियों की भूमिका पर नजर रखी जा रही है।
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