करौली पंचायत चुनाव: आरक्षण की तस्वीर साफ, 11 प्रधान पदों के लिए तय हुआ समीकरण
करौली जिले में पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण प्रक्रिया पूरी हो गई है, जिससे 11 प्रधान पदों और पंचायत समितियों के वार्डों का आरक्षण स्पष्ट हो गया है।

करौली। करौली जिले में आगामी पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर आरक्षण की प्रक्रिया संपन्न होने के साथ ही चुनावी बिसात बिछ गई है। जिला मुख्यालय पर आयोजित इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के तहत जिला परिषद के 35 वार्डों, 195 पंचायत समिति वार्डों और जिले की 11 पंचायत समितियों के प्रधान पदों के लिए आरक्षण का निर्धारण कर दिया गया है। इस सूची के जारी होने से राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता में अचानक तेजी आ गई है।
जिला परिषद के 35 वार्डों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अनारक्षित वर्ग के लिए सीटों का आवंटन किया गया है। आरक्षण के नियमों के अनुसार, एसटी वर्ग के 4 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं, जबकि एससी के 5 में से 4 वार्ड एससी महिला के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। इसके अलावा, अनारक्षित वर्ग के 17 वार्डों में से 9 वार्ड अनारक्षित महिला वर्ग के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिससे चुनावी भागीदारी में विविधता सुनिश्चित होगी।
जिले की विभिन्न पंचायत समितियों जैसे कुड़गांव, मंडरायल, सपोटरा, करौली, हिण्डौन, श्रीमहावीरजी, शेरपुर-सुरौठ, टोडाभीम और मासलपुर में भी वार्डवार आरक्षण लागू कर दिया गया है। प्रत्येक पंचायत समिति के वार्डों में वर्गवार आरक्षण तय होने से अब दावेदारों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जो उम्मीदवार लंबे समय से तैयारी कर रहे थे, वे अब अपने वार्ड की आरक्षित श्रेणी के अनुसार अपनी दावेदारी को परख रहे हैं।
प्रधान पदों के आरक्षण ने जिले के सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। करौली, मासलपुर और सपोटरा को अनारक्षित रखा गया है, जबकि हिण्डौन, नादौती और मंडरायल में प्रधान पद अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित हैं। श्रीमहावीरजी में एसटी, शेरपुर-सुरौठ में एससी, टोडाभीम में एससी महिला, बालघाट में ओबीसी और कुड़गांव में एसटी महिला के लिए प्रधान पद आरक्षित किए गए हैं।
आरक्षण की इस नई व्यवस्था के कारण कई सीटों पर नए चेहरों के सामने आने की प्रबल संभावना है। विशेष रूप से महिला, एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर राजनीतिक दलों के बीच मंथन शुरू हो गया है। अब सभी की निगाहें चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और नामांकन प्रक्रिया की तारीखों पर टिकी हैं। आरक्षण सूची ने चुनाव की बुनियादी तस्वीर स्पष्ट कर दी है, जिससे अब राजनीतिक दलों को अपने उम्मीदवारों के चयन में आसानी होगी।
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