अलवर। लक्षमेश कुमार सिंह अध्यक्ष पूर्वांचल विकास सेवा समिति ने बताया कि छठ महापर्व की शुरुआत नहाए खाए से हो गई है व्रत करने वाले लोग नहाने के बाद सूर्य देवता को जल चढ़ाते हैं उसके उपरांत शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं इस तरह से इस दिन को शुद्धि के दिन भी कहा जाता है नहाए खाए के बाद खरना पर्व मनाया जाएगा। जिसमें गन्ने के रस में खीर शादी रोटी के प्रसाद बनाए जाते हैं इस खाने के बाद 24 घंटे के उपवास के बाद आज शाम को खरना के प्रसाद ग्रहण करेंगे और उसके उपरांत 36 घंटे का निर्जला व्रत प्रारंभ होगी इसी तरह छठ महापर्व मनाया जाता है।
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