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शेखावाटी साहित्य संगम: इतिहास की गौरवगाथा और डिजिटल युग की चुनौतियों पर मंथन

शेखावाटी साहित्य संगम के दूसरे दिन इतिहास, तकनीक और लोककला के संगम पर चर्चा हुई। नाटकों और प्रतियोगिताओं के जरिए संस्कृति को जीवंत किया गया।

शेखावाटी साहित्य संगम में लोकनृत्य की प्रस्तुति देते कलाकार
शेखावाटी साहित्य संगम में लोकनृत्य की प्रस्तुति देते कलाकार

सीकर। सीकर के सालासर रोड स्थित गोविंदम रिसॉर्ट में आयोजित शेखावाटी साहित्य संगम के दूसरे दिन का आयोजन ज्ञान और संस्कृति का अनूठा केंद्र बना। श्री केशव संस्कृति प्रन्यास और पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में इतिहास की सीख और आधुनिक तकनीक की चुनौतियों पर गहन विमर्श किया गया।

कार्यक्रम के पहले सत्र में 'जेन जेड, टेक्नोलॉजी और एल्गोरिद्म' विषय पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने वर्ष 2047 के विकसित भारत में युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया। वक्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सोशल मीडिया के दौर में युवाओं को अपने वास्तविक लक्ष्यों के प्रति सजग रहने की सलाह दी। अभिनेता राहुल सिंह ने स्पष्ट किया कि सिनेमा और आभासी दुनिया के आकर्षण से परे, जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और मेहनत ही एकमात्र मार्ग है।

शेखावाटी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने हवेलियों की भित्तिचित्र कला और पारंपरिक स्थापत्य को सहेजने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने प्राकृतिक रंगों और प्राचीन तकनीकों के संरक्षण को समय की मांग बताया। वहीं, महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदन सिंह राठौड़ ने हल्दीघाटी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में साहस और दूरगामी रणनीति ही विजय का आधार बनती है।

गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान और उनकी शिक्षाओं की वर्तमान प्रासंगिकता पर भी एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया। आयोजन का सांस्कृतिक पक्ष लोककला प्रतियोगिताओं के माध्यम से और भी निखर कर सामने आया, जिसमें 200 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

रात्रिकालीन सत्र में जयपुर के युवतरंग संस्कृत नाट्य दल ने संत शिरोमणि गुरु रविदास के जीवन पर आधारित नाटक प्रस्तुत कर सामाजिक समानता और श्रम की गरिमा का संदेश दिया। इसके अलावा, जालौर की शौर्यगाथा पर आधारित नाटक 'वीरांगना हीरा दे' ने दर्शकों को स्वाभिमान और कर्तव्य की प्रेरणा दी।

संगम परिसर में लगे पुस्तक मेले ने साहित्य प्रेमियों को इतिहास और संस्कृति से जुड़ी पुस्तकों से रूबरू होने का अवसर दिया। रविवार को होने वाले सत्रों में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ और इतिहासकार राजवीर सिंह चलकोई राजस्थान की वीर परंपराओं पर अपने विचार साझा करेंगे।