खाद की किल्लत और जबरन बिक्री पर सांसद हरीश चंद्र मीना सख्त, केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र
सांसद हरीश चंद्र मीना ने रबी बुवाई के दौरान खाद की कमी और नैनो डीएपी की जबरन बिक्री के खिलाफ केंद्रीय मंत्री से कार्रवाई की मांग की है।

टोंक/सवाई माधोपुर। टोंक-सवाई माधोपुर संसदीय क्षेत्र में रबी की बुवाई के दौरान खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। सांसद हरीश चंद्र मीना ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को पत्र लिखकर क्षेत्र में डीएपी और यूरिया की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने वितरण व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आग्रह किया है।
सांसद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि रबी फसल की बुवाई का समय अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस दौरान किसानों को खाद की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से मिल रही शिकायतों के अनुसार, किसानों को निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे उनकी बुवाई प्रक्रिया बाधित हो रही है। उन्होंने केंद्र से मांग की है कि किसानों की आवश्यकता के अनुरूप खाद की नियमित और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो।
वितरण प्रणाली में गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए सांसद ने नैनो डीएपी की जबरन बिक्री पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर किसानों को डीएपी खाद के साथ नैनो डीएपी की बोतल खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए उन्होंने इसकी जांच कराने और बिना किसी अनिवार्य अतिरिक्त खरीद के खाद उपलब्ध कराने की मांग की है।
इसके अतिरिक्त, सांसद ने खाद की जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायतों को भी प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का सीधा असर किसानों की आय और फसल उत्पादन पर पड़ता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर शिकायतों की निष्पक्ष जांच करने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
सांसद मीना ने केंद्र सरकार से इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप की अपील की है ताकि रबी सीजन के दौरान किसानों को कृषि आदानों के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सरकार की ओर से की जाने वाली कार्रवाई से खाद वितरण में पारदर्शिता आएगी और किसानों को राहत मिलेगी।
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