ईसरदा बांध परियोजना: सवाई माधोपुर और दौसा के लाखों परिवारों को जल्द मिलेगा शुद्ध पेयजल
3,588 करोड़ की ईसरदा-दौसा पेयजल परियोजना से 1,256 गांवों और 6 कस्बों में जल संकट दूर होगा, सवाई माधोपुर के 177 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ।

सवाई माधोपुर। दौसा और सवाई माधोपुर जिलों के हजारों परिवारों के लिए ईसरदा-दौसा पेयजल परियोजना एक बड़ी राहत बनकर सामने आई है। करीब 3,588 करोड़ रुपए की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 1,256 गांवों और 6 कस्बों को शुद्ध पेयजल नेटवर्क से जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है। राजस्थान सरकार का लक्ष्य इस परियोजना के माध्यम से लगभग 35 लाख लोगों को गुणवत्तापूर्ण पानी उपलब्ध कराना है, जिससे क्षेत्र की पुरानी पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
सवाई माधोपुर जिले के लिए यह परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां क्लस्टर पैकेज-6 के तहत 177 गांवों को पेयजल नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। इसमें बौंली तहसील के 99, मलारना डूंगर के 61 और चौथ का बरवाड़ा के 17 गांव शामिल हैं। इन गांवों में घर-घर कनेक्शन देने के लिए 260.62 करोड़ रुपए का कार्यादेश 6 सितंबर 2025 को जारी किया जा चुका है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति की स्थिति में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।
परियोजना अब निर्माण के चरण से आगे बढ़कर टेस्टिंग की ओर बढ़ चुकी है। ईसरदा बांध के इंटेक वेल से कच्चा पानी 225 एमएलडी क्षमता वाले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंच चुका है, जहां वर्तमान में टेस्टिंग और कमिशनिंग का कार्य जारी है। मुख्य ट्रांसमिशन पाइपलाइन का काम भी लगभग पूरा होने को है, जिसमें 341 किलोमीटर की प्रस्तावित लाइन में से 299 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। ईसरदा और बगड़ी में फिल्टर प्लांट और जलाशयों का निर्माण कार्य भी पूर्ण हो चुका है।
प्रशासन ने नवंबर 2026 तक शहरी क्षेत्रों में मुख्य पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरचनाओं के निर्माण और चरणबद्ध तरीके से कनेक्शन जोड़कर जलापूर्ति शुरू की जाएगी। दौसा जिले में भी लालसोट, बसवा और महुआ जैसे क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में जल सुरक्षा का एक नया ढांचा तैयार हो रहा है।
ईसरदा बांध का पानी केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा का आधार है। स्थानीय जलस्रोतों पर निर्भरता कम होने से ग्रामीण परिवारों को नियमित और स्वच्छ पानी मिल सकेगा। परियोजना की सफलता अब अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने और घरेलू कनेक्शनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर टिकी है, जिससे बौंली, मलारना डूंगर और चौथ का बरवाड़ा के निवासियों को इसका सीधा लाभ मिल सके।
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