श्राद्ध पक्ष का आगाज: करौली के नदी घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
करौली में पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ ही नदी दरवाजा कुंड और प्रमुख नदियों के घाटों पर तर्पण और पिंडदान के अनुष्ठान शुरू हो गए हैं।

करौली। पितरों के प्रति श्रद्धा और उनके स्मरण का पावन पर्व श्राद्ध पक्ष शनिवार से विधिवत रूप से आरंभ हो गया है। इस दौरान करौली के विभिन्न धार्मिक स्थलों, विशेषकर नदी दरवाजा स्थित कुंड, पंचना नदी और भद्रावती नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। लोग अपने पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए तर्पण, जल अर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक अनुष्ठान पूरी निष्ठा के साथ संपन्न कर रहे हैं।
श्राद्ध पक्ष के दौरान हिंदू परंपराओं का पालन करते हुए परिवार के सदस्य अपने दिवंगत परिजनों की पुण्यतिथि के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं। इन घाटों और आसपास की बगीचियों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखी जा रही है, जो अपने पूर्वजों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। दान-पुण्य और जरूरतमंदों को भोजन कराना इस अवधि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिसे लेकर लोगों में विशेष उत्साह और श्रद्धा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में किए गए ये अनुष्ठान पितरों को तृप्त करते हैं और परिवार पर उनका आशीर्वाद बनाए रखते हैं। यह समय न केवल पूर्वजों को याद करने का है, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने और कृतज्ञता व्यक्त करने का भी एक माध्यम है। स्थानीय लोग पूरी श्रद्धा के साथ इन परंपराओं का निर्वहन कर रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय हो गया है।
यह विशेष पखवाड़ा 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ संपन्न होगा। अमावस्या का दिन उन सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जिनकी मृत्यु की तिथि परिजनों को ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश समय पर नहीं हो पाता। सर्वपितृ अमावस्या के दिन सभी पूर्वजों के निमित्त तर्पण कर उन्हें विदाई दी जाएगी। तब तक करौली के प्रमुख घाटों पर अनुष्ठानों का यह क्रम निरंतर जारी रहेगा।
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