सवाई माधोपुर के किसान का अनोखा प्रयोग, पारंपरिक खेती को छोड़ अपनाया ड्रैगन फ्रूट
सवाई माधोपुर के मोहचा गांव के प्रगतिशील किसान डॉ. सियाराम मीना ने ड्रैगन फ्रूट की खेती कर कम पानी में अधिक मुनाफे का नया मॉडल पेश किया है।

सवाई माधोपुर। सवाई माधोपुर जिले की वजीरपुर तहसील के मोहचा गांव में एक प्रगतिशील किसान ने खेती की नई इबारत लिखी है। डॉ. सियाराम मीना ने पारंपरिक फसलों से हटकर ड्रैगन फ्रूट यानी कमलम की खेती को अपनाकर क्षेत्र के किसानों के सामने एक लाभकारी और आधुनिक मॉडल प्रस्तुत किया है। यह पहल न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो रही है, बल्कि जल संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
डॉ. मीना के अनुसार, ड्रैगन फ्रूट की खेती में पानी की खपत पारंपरिक फसलों की तुलना में काफी कम होती है, जबकि बाजार में इसका मूल्य काफी बेहतर मिलता है। इस पूरी प्रक्रिया में सहायक कृषि अधिकारी पिन्टू मीना पहाड़ी ने तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। वैज्ञानिक तरीके से पौध रोपण, सपोर्ट सिस्टम तैयार करने, सिंचाई व्यवस्था और खाद-पोषण के प्रबंधन ने इस फसल को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रैगन फ्रूट की फसल के लिए ड्रिप सिंचाई और जल निकासी का उचित प्रबंधन सबसे जरूरी है। यदि सही रोपण सामग्री का चयन किया जाए और वैज्ञानिक तरीके से देखभाल की जाए, तो यह फसल लगभग 12 से 18 महीने के भीतर फल देने लगती है। यह समय सीमा किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प के रूप में देखी जा रही है।
हाल ही में कृषि विस्तार के अतिरिक्त निदेशक देशराज सिंह ने डॉ. मीना के खेत का दौरा कर फसल का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने ड्रैगन फ्रूट को एक उच्च मूल्य वाली फल फसल बताते हुए कहा कि सीमित पानी वाले क्षेत्रों के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए किसान कम पानी में भी इस फसल से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
डॉ. मीना का यह प्रयोग सवाई माधोपुर के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि अन्य किसान भी इसी तरह की तकनीक और मार्गदर्शन का पालन करें, तो क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। यह पहल साबित करती है कि नवाचार और सही तकनीकी जानकारी के साथ खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है।
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