सवाई माधोपुर की अरावली पहाड़ियों में गूंजेगा मां सीता का जयकारा, चार दिवसीय मेले की तैयारियां जोरों पर
सवाई माधोपुर में 23 से 26 सितंबर तक आयोजित होने वाले सीता माता मेले के लिए विकास समिति ने कमर कस ली है। भजन संध्या और लोकगीत कार्यक्रमों के साथ विशाल भंडारे की तैयारी पूरी कर ली गई है।

सवाई माधोपुर। सवाई माधोपुर की अरावली पर्वत श्रृंखलाओं में स्थित प्राचीन सीता माता मंदिर में वार्षिक विराट मेले का आयोजन होने जा रहा है। यह चार दिवसीय धार्मिक उत्सव 23 सितंबर से शुरू होकर 26 सितंबर तक चलेगा। इस आयोजन को लेकर स्थानीय निवासियों और सीता माता विकास समिति के सदस्यों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। मेले की भव्यता और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए समिति ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
मेले की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के लिए हाल ही में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। समिति के अध्यक्ष भैरूलाल मीणा और मीडिया प्रभारी मुकेश मीणा मांदल की उपस्थिति में हुई इस बैठक में नीमली खुर्द, जीनापुर, नीमली कला, वजपुर, जुवाड़ और कुस्तला सहित आसपास के कई गांवों के पंच-पटेलों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। बैठक में धार्मिक कार्यक्रमों के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
मेले के दौरान सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इसमें भजन संध्या, पारंपरिक कन्हैया दंगल और लोकगीत समारोह मुख्य आकर्षण होंगे। समिति के सदस्यों ने मेले को सफल बनाने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल ली हैं। आयोजकों का मानना है कि इस वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचेंगे, जिसके लिए व्यापक प्रबंध किए जा रहे हैं।
मेले के समापन पर आयोजित होने वाले विशाल भंडारे और महाप्रसादी की तैयारियां भी जोर-शोर से चल रही हैं। इस पुनीत कार्य के लिए ग्रामीणों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। धमून खुर्द के परशुराम मीणा ने आटा और चीनी का योगदान दिया है, जबकि नीमली खुर्द के कमल सिंह मीणा ने बेसन और दाल की व्यवस्था की है। समिति पदाधिकारियों ने बताया कि सामग्री की खरीदारी पूरी कर ली गई है ताकि अंतिम दिन आने वाले सभी भक्तों को प्रसाद मिल सके।
अरावली की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। समिति का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित और भक्तिमय वातावरण प्रदान करना है। स्थानीय प्रशासन और समिति के आपसी समन्वय से इस मेले को भव्य बनाने की पूरी कोशिश की जा रही है, ताकि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।
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