सवाई माधोपुर के लग्जरी रिजॉर्ट में घुसा लेपर्ड, वन विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही जंगल में हुआ ओझल
सवाई माधोपुर के आलनपुर स्थित एक रिजॉर्ट में बुधवार रात लेपर्ड के घुसने से हड़कंप मच गया। वन विभाग की टीम के पहुंचने पर लेपर्ड खिड़की से निकलकर जंगल की ओर भाग गया।

सवाई माधोपुर। सवाई माधोपुर के आलनपुर इलाके में बुधवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया जब खाटू श्याम मंदिर के पास स्थित एक लग्जरी रिजॉर्ट में लेपर्ड के घुसने की सूचना मिली। रात करीब 10:30 बजे हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों और रिजॉर्ट प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी। कुछ खबरों में यह भी दावा किया गया है कि लेपर्ड के साथ उसका शावक भी मौजूद था। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और लेपर्ड को सुरक्षित पकड़ने के लिए ट्रेंकुलाइज करने की तैयारी शुरू की।
वन विभाग के अधिकारियों ने रिजॉर्ट परिसर में सर्च ऑपरेशन चलाया ताकि लेपर्ड को सुरक्षित तरीके से जंगल में वापस भेजा जा सके। हालांकि, टीम की कार्रवाई के दौरान लेपर्ड ने खिड़की का रास्ता चुना और अंधेरे का फायदा उठाकर जंगल की ओर भाग निकला। इस घटना के बाद वन विभाग ने आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है ताकि किसी भी अनहोनी को रोका जा सके।
आलनपुर क्षेत्र में लेपर्ड का यह मूवमेंट कोई नई बात नहीं है। करीब एक महीने पहले भी इसी इलाके में एक लेपर्ड ने दो गायों का शिकार किया था, जिसके बाद वन विभाग ने उसे पिंजरे में कैद कर रणथंभौर के जंगलों में छोड़ा था। इसके अलावा, अगस्त 2026 में पुराने शहर के रामलीला मैदान और 72 सीढ़ी जैसे इलाकों में भी लेपर्ड की गतिविधियां लगातार तीन दिनों तक देखी गई थीं। टोडरा गांव में भी एक घर के भीतर लेपर्ड के घुसने की घटना सामने आ चुकी है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि रणथंभौर के जंगलों में बाघों की बढ़ती संख्या और उनके क्षेत्रीय दबाव के कारण लेपर्ड अब सुरक्षित ठिकानों और शिकार की तलाश में जंगल की सीमाओं से बाहर निकल रहे हैं। मानव बस्तियों के पास मौजूद मवेशी और कुत्ते उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आकर्षित करते हैं। इन लगातार बढ़ती घटनाओं ने वन विभाग के सामने मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने और आबादी वाले क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती पेश कर दी है।
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