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जयपुर टाइम्स
सवाई माधोपुर

सवाई माधोपुर में पुलिस अधिकारी से अभद्रता का मामला गरमाया, संगठनों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

नगर परिषद उपसभापति चुनाव के दौरान पुलिस उपाधीक्षक के साथ हुई कथित धक्का-मुक्की के बाद नागरिक संगठनों ने FIR दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
सवाई माधोपुर में पुलिस अधिकारी से अभद्रता का मामला गरमाया, संगठनों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

सवाई माधोपुर। सवाई माधोपुर नगर परिषद में उपसभापति पद के चुनाव के दौरान नामांकन कक्ष में प्रवेश को लेकर हुआ विवाद अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। शहर के पुलिस उपाधीक्षक राजेंद्र मीणा के साथ हुई कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की के मामले ने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस घटना को लेकर विभिन्न नागरिक संगठनों ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर की है।

विवाद की शुरुआत नामांकन प्रक्रिया के दौरान हुई, जब भाजपा चुनाव प्रभारी मदन प्रजापत और पुलिस उपाधीक्षक राजेंद्र मीणा के बीच कक्ष में प्रवेश को लेकर तीखी बहस हुई। आरोप है कि इस दौरान स्थिति बिगड़ गई और पुलिस अधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मौके पर मौजूद लोगों के बीच नोक-झोंक साफ देखी जा सकती है, हालांकि इसकी सत्यता और घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

बुधवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिला निर्वाचन अधिकारी और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। संगठनों का कहना है कि चुनाव जैसे संवेदनशील समय में कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, और उनके साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए उचित नहीं है।

जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज और मौके पर बनाए गए मोबाइल वीडियो को सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने जोर दिया कि इन साक्ष्यों के आधार पर ही घटना की सच्चाई सामने आ सकेगी। प्रशासन से यह भी अपेक्षा की गई है कि संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर मामले की गंभीरता से पड़ताल की जाए।

फिलहाल, यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। सामाजिक संगठनों के दबाव के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।

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