NEET-UG 2026 पर सियासत तेज: 16 जुलाई को संसदीय समिति के सामने जवाब देगा NTA
पेपर लीक विवाद और दोबारा परीक्षा के बाद संसद तक पहुंचा मामला, परीक्षा की पारदर्शिता और एनटीए की कार्यप्रणाली पर होगी विस्तृत चर्चा

नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 परीक्षा को लेकर देशभर में जारी विवाद अब संसद की स्थायी समिति तक पहुंच गया है। संसद की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी विभागीय स्थायी समिति 16 जुलाई को नीट परीक्षा के आयोजन और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली की समीक्षा करेगी। बैठक में एनटीए के प्रतिनिधियों को बुलाया गया है, जिनसे परीक्षा की सुरक्षा, पारदर्शिता और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के उपायों पर सवाल किए जा सकते हैं।
नीट-यूजी 2026 की मूल परीक्षा में कथित पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित किया गया था। पुनर्परीक्षा 21 जून को कराई गई। लाखों विद्यार्थियों को दूसरी बार परीक्षा में शामिल होना पड़ा, जिसके कारण छात्रों और उनके अभिभावकों में नाराजगी देखी गई।
संसदीय समिति की बैठक 16 जुलाई को दोपहर 12:30 बजे से नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में प्रस्तावित है। बैठक का प्रमुख विषय राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के अंतर्गत नीट परीक्षा का संचालन और स्वास्थ्य मंत्रालय से संबंधित नियामक संस्थाओं की कार्यक्षमता रहेगा।
समिति के सामने एनटीए के प्रतिनिधि नीट परीक्षा के आयोजन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और कथित पेपर लीक के बाद उठाए गए कदमों की जानकारी प्रस्तुत करेंगे।
समिति यह भी जानने का प्रयास कर सकती है कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद गड़बड़ी की आशंका कैसे पैदा हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की गई।
इससे पहले शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने एक जुलाई को नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा प्रक्रिया और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को मजबूत बनाने के उपायों की समीक्षा की थी।
इस बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, एनटीए के महानिदेशक और एनटीए में सुधारों से संबंधित उच्च स्तरीय समिति के प्रमुख रहे डॉ. के. राधाकृष्णन को बुलाया गया था। समिति ने पुनर्परीक्षा से मिले अनुभवों और भविष्य में परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने के उपायों पर चर्चा की।
अब स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी संसदीय समिति द्वारा नीट के संचालन की समीक्षा किए जाने से इस मामले पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव और बढ़ने की संभावना है।
नीट पेपर लीक विवाद को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर हमलावर है। कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है।
कांग्रेस ने इस अभियान को ‘छात्रों की गूंज’ नाम दिया है। पार्टी का आरोप है कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों के कारण विद्यार्थियों का राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली से विश्वास कम हुआ है। कांग्रेस ने एनटीए की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच और परीक्षा प्रक्रिया में जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई है।
विपक्ष का कहना है कि लाखों विद्यार्थियों की मेहनत और भविष्य से जुड़ी परीक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। विपक्षी दल इस मुद्दे को आगामी संसदीय कार्यवाही के दौरान भी उठाने की तैयारी में हैं।
इससे पहले एनटीए के अधिकारियों ने संसदीय समिति के सामने कहा था कि प्रश्नपत्र एजेंसी की आंतरिक प्रणाली से लीक नहीं हुआ। अधिकारियों ने बताया था कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो कर रहा है।
हालांकि सांसदों ने एनटीए अधिकारियों से पूछा था कि प्रश्नपत्र की सुरक्षा के लिए कई स्तरों की व्यवस्था होने के बावजूद परीक्षा की गोपनीयता पर सवाल कैसे खड़े हुए। समिति के सदस्यों ने जिम्मेदारी तय करने और परीक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया था।
नीट-यूजी पेपर लीक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताते हुए जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। अदालत ने कहा था कि ऐसी घटनाओं से केवल विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि उनके परिवार भी मानसिक और आर्थिक दबाव का सामना करते हैं।
अदालत में एनटीए की ओर से परीक्षा की सुरक्षा और जांच से संबंधित जानकारी प्रस्तुत की गई थी। न्यायालय ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए पहले दी गई सिफारिशों के क्रियान्वयन की स्थिति पर भी सवाल किए थे।
नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को देश और विदेश के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी। परीक्षा में शामिल विद्यार्थियों को अब अंतिम उत्तर कुंजी और परिणाम का इंतजार है।
परिणाम घोषित होने के बाद मेडिकल काउंसलिंग कमेटी की ओर से एमबीबीएस, बीडीएस और अन्य चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की जाएगी। विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे परिणाम और काउंसलिंग से संबंधित जानकारी के लिए केवल एनटीए तथा मेडिकल काउंसलिंग कमेटी की आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें।
16 जुलाई को होने वाली संसदीय समिति की बैठक पर देशभर के मेडिकल अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों की नजर रहेगी। बैठक में एनटीए की ओर से दिए जाने वाले जवाब और समिति की संभावित सिफारिशें भविष्य की परीक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।
पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा केंद्रों की निगरानी, प्रश्नपत्रों के परिवहन, डिजिटल सुरक्षा, अधिकारियों की जवाबदेही और नीट को कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा तेज हो गई है।
विद्यार्थियों की सबसे बड़ी मांग है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को निष्पक्ष, सुरक्षित और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि प्रशासनिक विफलता का नुकसान ईमानदारी से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को न उठाना पड़े।
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