दूधली में भू-माफियाओं ने निगल लिया सरकारी नाला , अवैध कॉलोनी के लिए बदला बहाव, अब गांव की सड़क बनी तालाब

दूधली में सरकारी जल मार्ग को डकारकर काट दिए अवैध कॉलोनी , अब पूरा गांव भुगत रहा है सजा। जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल
दूधली में सरकारी नाले को हजम कर बसा दी अवैध कॉलोनी , भू माफियाओं के खेल में डूबी दूधली की मुख्य सड़क , जल स्त्रोत संरक्षण के दावों की खुली पोल।
जयपुर टाइम्स,बस्सी।
एक तरफ सरकार मंचों से जल स्रोतों को बचाने के दावे कर रही है दूसरी तरफ प्रशासन की नाक के नीचे बस्सी के दूधली गांव में भू-माफियाओं ने राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज सरकारी नाले का ही अस्तित्व बदलकर डकार मार लिया। नतीजा यह कि बरसाती पानी अब प्राकृतिक रास्ते से बहने के बजाय गांव की मुख्य सड़क और कॉलोनी में भर रहा है। उपखंड कार्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर हुई इस कथित कारस्तानी ने प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आपको बता दें कि बस्सी के दूधली गांव में अवैध कॉलोनी बसाने के लिए सरकारी नाले का स्वरूप बदलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि भू-माफियाओं ने प्लॉटों का फ्रंट बढ़ाने और अधिक मुनाफा कमाने के लालच में वर्षों पुराने तथा राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज गैर मुमकिन नाले पर ही कॉलोनी विकसित कर दी। जानकारी के अनुसार राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज खसरा नंबर 78/1 गैर मुमकिन नाला है जो खसरा नंबर 52 और 134 के बीच से होकर गुजरता था। वहीं खसरा नंबर 14 नाले के ढाल और बहाव क्षेत्र में स्थित था। आरोप है कि कॉलोनी विकसित करने के दौरान नाले के मूल मार्ग को खत्म कर उसका बहाव जबरन खसरा नंबर 15 की ओर मोड़ दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि आगरा रोड से गांव की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर खसरा नंबर 14 का सड़क की तरफ फ्रंट पहले कम था और पीछे की ओर चौड़ा था। लेकिन कॉलोनी काटते समय सड़क की ओर का हिस्सा नाले की जमीन मिलाकर चौड़ा कर दिया गया, जबकि पीछे का हिस्सा संकरा छोड़ दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यही तथ्य पूरे खेल की पोल खोल रहा है। इस कथित छेड़छाड़ का सबसे बड़ा असर जल निकासी व्यवस्था पर पड़ा है। जो नाला पहले खसरा नंबर 145 स्थित तलाई में जाकर पानी छोड़ता था उसका बहाव बदलने से अब बरसाती पानी गांव की मुख्य सड़क पर जमा हो रहा है। सड़क पर पानी भरने से ग्रामीणों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पानी निकासी का रास्ता बंद होने से आसपास की कॉलोनी और खेतों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार जिस खसरा नंबर 15 की ओर नाले का बहाव मोड़ा गया वह एक ऐसे परिवार की भूमि है जो प्रभावशाली लोगों का विरोध करने की स्थिति में नहीं था। ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध के बावजूद उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई और अब उनके खेतों से होकर पानी बह रहा है। इस पूरे मामले से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज सरकारी नाले पर अतिक्रमण और बहाव परिवर्तन की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े खुलासे हो सकते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मौके का निरीक्षण कर मूल नाले को बहाल करने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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