Rohini Gurjar Success Story: कहते हैं अगर दिल में कुछ कर गुजरने का हौसला हो तो मुश्किल है हमारा रास्ता नहीं रोक सकती। आज हम आपको राजस्थान के अजमेर की रहने वाली रोहिणी गुर्जर की कहानी बताएंगे जिन्होंने दुखों के पहाड़ को क्या कर राजस्थान लोक सेवा आयोग भर्ती परीक्षा 2024 में अपना परचम लहराया।
रोहिणी की कहानी बाकी औरतों की तरह बिल्कुल नहीं है। इस परीक्षा को पास करने के लिए रोहिणी को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 2024 में Ras परीक्षा पास करके रोहिणी गुर्जर अकाउंट सर्विस अधिकारी बनी। पति के मौत के बाद उनका गांव में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था लोगों ने उन्हें ताने देने शुरू कर दिए।
15 साल के बाद उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की और परीक्षा से 22 दिन पहले उनकी बड़ी बेटी की मौत हो गई। उन्हें ऐसा लगा कि उन्होंने सब कुछ खो दिया है लेकिन छोटी बेटी का चेहरा देखकर उन्होंने हिम्मत किया। 2024 परीक्षा में उन्हें सफलता मिली और सितंबर 2026 में उन्हें ट्रेनिंग के बाद पहली जॉइनिंग मिली।
रोहिणी गुर्जर नाम मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि वह गांव की पहली लड़की थी जिन्होंने 2006 में BA की परीक्षा पास की। उनके गांव में लड़कियों को ज्यादा नहीं पढ़ाया जाता है लेकिन उनके पिता फौज में थे इसलिए रोहिणी को आगे पढ़ने का मौका मिला था।
शादी के बाद छूट गई थी पढ़ाई
कोई नहीं बताया कि 22 साल की उम्र में साल 2011 में उनकी शादी हो गई थी और शादी के लगभग डेढ़ साल के बाद 2013 में उनकी पहली बेटी का जन्म हुआ। ससुराल वालों से उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला क्योंकि उनका परिवार काफी रूढ़िवादी था। उनके गांव में बहू को अपने अक्षर से आगे बढ़ाने की आजादी नहीं मिलती थी। शादी के बाद रोहिणी घर संभालने लगी। 2021 में दिसंबर में हार्ट अटैक से उनके पति का मौत हो गया इसके बाद उनकी जिंदगी बदल गई।
रोहिणी के सिर्फ दो बेटियां थी जिसके वजह से उनके ससुराल वाले उन्हें ताना देते थे। ससुराल के लोगों का कहना था कि उनका बस आगे कैसे बढ़ेगा और उन्हें पति के मौत का जिम्मेदार बताता जाता था गांव के लोगों ने डायन कहते थे।
15 साल के बाद दोबारा शुरू की पढ़ाई
धीरे-धीरे रोहिणी ने खुद को संभाल उसे समय उनकी दादी सास जो की 95 साल की थी वह रोहिणी का पूरा साथ दे। पति के मौत के 6 महीने के बाद रोहिणी ने दोबारा पढ़ाई शुरू किया लेकिन गांव में रहकर उन्हें तैयारी समझ नहीं आ रही थी लेकिन वह अंधेरे में तीर चला रही थी। इस दौरान केवल उनके भाई नरेंद्र गुर्जर और दादी सास पुष्पा देवी उनका हौसला बढ़ाती थी।
पहली बार 2021 में उन्होंने परीक्षा दिया लेकिन प्रीलिम्स क्लियर हो गया लेकिन मेंस में 10 नंबर से वह पीछे रह गई। उन्होंने जयपुर में रहकर तैयारी शुरू कर दी। 2024 में दादी सास का निधन हो गया जो कि उनका सहारा थे उसके बाद रोहिणी को झटका लगा और 2024 मे ही उनकी बड़ी बेटी का निधन हो गया इसके बाद उन्हें कोई संभालने वाला नहीं था। लेकिन उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया उन्होंने तैयारी शुरू कर दी। मुश्किलों से लड़ते हुए रोहिणी ने सोच लिया कि मैं कुछ बनूंगी तभी भविष्य बेहतर होगा और उन्होंने तैयारी शुरू कर दी। मुश्किलों से लड़ते हुए रोहिणी गुर्जर ने इस परीक्षा को पास कर दिखाया।