भीलवाड़ा। मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट ने राजस्थान में अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संगठन के विस्तार और नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने के उद्देश्य से ट्रस्ट ने गौरव सिंह भाला को चित्तौड़ प्रांत का संयोजक नियुक्त किया है। यह नियुक्ति राज्य में श्री कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषयों को व्यापक स्तर पर समाज के समक्ष रखने की एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों का मानना है कि जिस प्रकार राम जन्मभूमि आंदोलन ने हिंदू समाज की आस्था के केंद्र के लिए जन-जागरण और संगठनात्मक प्रयासों को एक दिशा दी थी, उसी तर्ज पर अब श्री कृष्ण जन्मभूमि के लिए भी कार्य किया जाएगा। संगठन का स्पष्ट मत है कि इस पूरे अभियान को शांतिपूर्ण, वैधानिक और लोकतांत्रिक माध्यमों से ही आगे बढ़ाया जाएगा। ट्रस्ट का लक्ष्य राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में अपने आधार को मजबूत करना और जन-जागरण के माध्यम से इस संकल्प को घर-घर तक पहुंचाना है।
नवनियुक्त चित्तौड़ प्रांत संयोजक गौरव सिंह भाला को प्रांत में कार्यकर्ताओं का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करने और जन-जागरण गतिविधियों को गति देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति से राजस्थान में ट्रस्ट के कार्यों को एक नई दिशा मिलने की प्रबल संभावना जताई गई है। संगठन का मानना है कि उनके नेतृत्व में स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं का जुड़ाव बढ़ेगा और अभियान को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा।
अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए गौरव सिंह भाला ने कहा कि श्री कृष्ण जन्मभूमि केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे पूरी निष्ठा के साथ इस संकल्प को समाज के बीच संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले समय में शांतिपूर्ण और संगठित प्रयासों के माध्यम से इस विषय की महत्ता को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
ट्रस्ट की आगामी कार्ययोजना में राजस्थान के विभिन्न जिलों में संगठनात्मक आधार को और अधिक सुदृढ़ करना शामिल है। इसके साथ ही, जन-जागरण अभियानों के जरिए लोगों को इस विषय से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। ट्रस्ट के पदाधिकारी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अनुशासित और मर्यादित तरीके से किए गए प्रयास ही समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। आने वाले महीनों में राज्य भर में कई जागरूकता कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।


