भरतपुर में भाजपा का मास्टरस्ट्रोक: निर्दलीय प्रत्याशी के हटने से अनुराधा सिंह बनीं निर्विरोध महापौर
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में नगर निगम चुनाव का मुकाबला बिना मतदान के समाप्त हो गया। गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम की सक्रियता के बाद निर्दलीय प्रत्याशी विचित्रा सिंह ने अपना नामांकन वापस ले लिया है।

भरतपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में शुक्रवार को नगर निगम महापौर चुनाव का परिणाम बिना किसी मतदान के ही तय हो गया। सत्ताधारी दल भाजपा ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत विपक्ष के तमाम समीकरणों को ध्वस्त करते हुए यह बड़ी जीत हासिल की। निर्दलीय प्रत्याशी विचित्रा सिंह द्वारा अपना नामांकन वापस लेने के बाद भाजपा की अधिकृत उम्मीदवार अनुराधा सिंह का निर्विरोध महापौर बनना सुनिश्चित हो गया है। इस घटनाक्रम को मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में भाजपा की साख के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
इस पूरे सियासी घटनाक्रम के सूत्रधार गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम रहे। जब चुनाव को लेकर निर्दलीयों की बाड़ेबंदी और गणितीय जोड़-तोड़ की चर्चाएं तेज थीं, तब मंत्री बेढम ने कमान संभाली। शुक्रवार सुबह उन्होंने पूर्व महापौर शिव सिंह भोंट के आवास पर जाकर उनसे लंबी चर्चा की। इस बंद कमरे की बैठक के बाद स्थितियां पूरी तरह बदल गईं। मंत्री बेढम खुद विचित्रा सिंह और शिव सिंह भोंट को लेकर नगर निगम कार्यालय पहुंचे, जहां नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई।
नामांकन वापसी के बाद गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि शिव सिंह भोंट ने भरतपुर के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा भरतपुर के लिए शुरू की गई विकास योजनाओं की गति को बनाए रखने के लिए यह एकता आवश्यक थी। मंत्री ने भोंट के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि अब सभी मिलकर शहर की तरक्की में योगदान देंगे।
पूर्व महापौर शिव सिंह भोंट ने अपने निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भरतपुर को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार का राजनीतिक अवरोध पैदा न हो, इसी उद्देश्य से उन्होंने मंत्री बेढम के आग्रह पर अपना नामांकन वापस लिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे शहर के हित में सरकार के साथ खड़े हैं।
भरतपुर नगर निगम के कुल 65 वार्डों में निर्दलीय पार्षदों का संख्याबल 36 था, जबकि भाजपा के पास 20 और कांग्रेस के पास 7 सीटें थीं। आंकड़ों के इस खेल में भाजपा के लिए चुनौती बड़ी थी, लेकिन रणनीतिकारों ने सीधे विपक्षी धुरी को ही अपने पाले में लाकर मुकाबले को एकतरफा बना दिया। इस निर्विरोध जीत ने न केवल भाजपा की स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि राज्य सरकार के भीतर मंत्री बेढम के चुनावी प्रबंधन कौशल को भी एक नई पहचान दी है।
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