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भीख नहीं हक चाहिए: दो साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही विधवा मां की गुहार

सिरोही के नया जोयला गांव की एक विधवा महिला ने दो साल की जद्दोजहद के बाद मीडिया के जरिए अपनी आवाज उठाई है। पंचायत ने अब सुध ली है, लेकिन परिवार को जिला प्रशासन से ठोस मदद का इंतजार है।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
भीख नहीं हक चाहिए: दो साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही विधवा मां की गुहार

सिरोही। सिरोही जिले के नया जोयला गांव की एक विधवा मां की व्यथा ने सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पति के निधन के बाद तीन बच्चों की जिम्मेदारी उठा रहीं श्रीमती देवी का कहना है कि वे पिछले दो वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन उन्हें कहीं से भी संतोषजनक सहायता नहीं मिली। जब सरकारी तंत्र से उम्मीदें धूमिल होने लगीं, तब उन्होंने अपनी पीड़ा को सार्वजनिक किया।

श्रीमती देवी दिहाड़ी मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। आर्थिक तंगी के कारण परिवार किराए के मकान में रहने को मजबूर है और बच्चों की पढ़ाई जारी रखना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस कठिन परिस्थिति के बावजूद, उनका दसवीं कक्षा में पढ़ने वाला बेटा करण कुमावत इंजीनियर बनने का सपना संजोए हुए है। करण का कहना है कि उसे पक्की छत से ज्यादा अपने भविष्य की चिंता है और उसे सरकार से पूरी उम्मीद है।

मीडिया में खबरें प्रमुखता से आने के बाद ग्राम पंचायत प्रशासन ने परिवार से संपर्क किया और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने का आश्वासन दिया है। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना और बीपीएल राशन कार्ड जैसी सुविधाएं शामिल हैं। हालांकि, परिवार के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें वास्तविक राहत कब तक मिलेगी।

सिरोही जिला परिषद के सीईओ दुर्गा शंकर ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है और बीडीओ को जांच के निर्देश दिए गए हैं। परिवार ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई है। श्रीमती देवी का स्पष्ट कहना है कि उन्हें समाज से सहानुभूति नहीं, बल्कि सरकार से पात्रता के आधार पर अपना हक चाहिए।

यह मामला केवल एक परिवार की आर्थिक तंगी का नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत का भी है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या करण का इंजीनियर बनने का सपना सरकारी फाइलों में दबेगा या उसे समय रहते मदद मिलेगी, यह आने वाला समय ही बताएगा।

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