विश्वकर्मा जयंती पर बीएमएस की हुंकार, 17 सितंबर को राष्ट्रीय श्रम दिवस घोषित करने की मांग
भारतीय मजदूर संघ ने विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर प्रदेश भर में ज्ञापन सौंपकर 17 सितंबर को राष्ट्रीय श्रम दिवस के रूप में घोषित करने की मांग की है।

जयपुर। भगवान विश्वकर्मा जयंती के पावन अवसर पर भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने जयपुर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा का पूजन और स्मरण किया गया, जिसमें बीएमएस से जुड़े विभिन्न संगठनों के सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता रमेश साईं ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में बीएमएस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य दीनानाथ रुठला और एस.के. राठौर ने शिरकत की।
दीनानाथ रुठला ने अपने संबोधन में भगवान विश्वकर्मा की शिल्पकला और उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को देवशिल्पी के रूप में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। उन्होंने लंका और द्वारका के निर्माण का उल्लेख करते हुए बताया कि ये निर्माण कार्य उनकी अद्भुत क्षमता और कौशल के प्रतीक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों के लिए भगवान विश्वकर्मा प्रेरणा के सबसे बड़े स्रोत हैं।
कार्यक्रम के बाद बीएमएस का एक प्रतिनिधिमंडल जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। संघ की प्रमुख मांग है कि 17 सितंबर को आधिकारिक रूप से 'राष्ट्रीय श्रम दिवस' घोषित किया जाए। संघ का मानना है कि यह दिन श्रम, कौशल और सृजन के सम्मान का प्रतीक है, और इसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने से श्रमिक वर्ग का मनोबल बढ़ेगा।
इस मांग को लेकर प्रदेश भर में जिला कलेक्टरों के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन भेजे गए हैं। बीएमएस के पदाधिकारियों ने कहा कि श्रमिक सम्मान की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण और आवश्यक कदम होगा। जयंतीलाल, यतेंद्रकुमार, महेंद्र सैनी, मालीराम स्वामी, महेश चतुर्वेदी और जिला प्रचार मंत्री अक्षय कुमार सहित कई अन्य कार्यकर्ता इस अवसर पर उपस्थित रहे। संघ ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी और जल्द ही उचित निर्णय लेगी।
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