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बेटी ने जीती छात्रवृत्ति, मां दो साल से सरकारी दफ्तरों में काट रही चक्कर

पोयणा गांव की विधवा फालू देवी ने मजदूरी कर बेटी को NMMS छात्रवृत्ति तक पहुंचाया, लेकिन उज्ज्वला योजना के लिए चार आवेदन के बाद भी उन्हें गैस कनेक्शन नहीं मिला।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
बेटी ने जीती छात्रवृत्ति, मां दो साल से सरकारी दफ्तरों में काट रही चक्कर

पोयणा, सुमेरपुर। सुमेरपुर के पोयणा गांव में एक मां के संघर्ष और सरकारी तंत्र की सुस्ती की कहानी सामने आई है। पति के निधन के बाद फालू देवी ने मजदूरी करके अपनी बेटियों को पढ़ाया और विपरीत परिस्थितियों में भी उनकी शिक्षा जारी रखी। उनकी मेहनत तब रंग लाई जब बेटी ममता कुमारी ने NMMS छात्रवृत्ति परीक्षा में सफलता हासिल की। अब ममता को कक्षा 9 से 12 तक हर साल 12 हजार रुपए की छात्रवृत्ति मिलेगी। गांव में बेटी की इस उपलब्धि पर गर्व है, लेकिन घर की रसोई आज भी सरकारी सहायता की बाट जोह रही है।

फालू देवी ने उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन पाने के लिए पिछले दो वर्षों में चार बार आवेदन किए हैं। उन्होंने ग्राम पंचायत से लेकर सरकारी शिविरों तक के चक्कर काटे, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी। दो साल तक दफ्तरों की दौड़ लगाने के बाद अब उन्होंने उम्मीद छोड़ दी है। जिस मां ने अपनी पूरी जिंदगी बेटी के भविष्य को संवारने में लगा दी, उसे आज भी रसोई के लिए दूसरों के सिलेंडर पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

ममता ने पोयणा के सरकारी स्कूल और बाद में जोयला के राजकीय विद्यालय में पढ़ाई कर यह मुकाम हासिल किया है। बेटी की सफलता परिवार के लिए उम्मीद की किरण है, लेकिन मां की परेशानी व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि फालू देवी पात्र हैं, तो चार आवेदन के बाद भी कनेक्शन क्यों नहीं मिला? और यदि पात्रता में कोई कमी थी, तो दो साल में उन्हें स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई? यह सवाल अब केवल एक महिला का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही का है।

इस मामले में संबंधित अधिकारी का पक्ष जानने के लिए सुमेरपुर विकास अधिकारी को फोन किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। एक पत्रकार की कॉल पर भी जिम्मेदार अधिकारी तक बात न पहुंचना, उस विधवा महिला की सुनवाई की स्थिति को दर्शाता है जो दो साल से सरकारी दफ्तरों के दरवाजे खटखटा रही है। उज्ज्वला योजना का उद्देश्य जरूरतमंदों तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाना है, लेकिन फालू देवी का मामला सरकारी संवेदनशीलता की परीक्षा ले रहा है। अब संबंधित विभाग को उनके आवेदनों की जांच कर नियमानुसार लाभ दिलाना चाहिए ताकि बेटी की सफलता के साथ मां की फरियाद भी सुनी जा सके।

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