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पोयणा में एक साल की लेटलतीफी का अंत: मीडिया की खबर के बाद बिजली विभाग ने शुरू किया काम

पोयणा गांव में 1.59 लाख रुपये जमा होने के बावजूद एक साल से ठप पड़ी पेयजल योजना मीडिया के हस्तक्षेप के बाद अब शुरू हो रही है।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
पोयणा में एक साल की लेटलतीफी का अंत: मीडिया की खबर के बाद बिजली विभाग ने शुरू किया काम

सुमेरपुर/पोयणा। पोयणा गांव के ग्रामीणों के लिए पेयजल की समस्या अब खत्म होने की राह पर है। सरकारी योजना के तहत ट्यूबवेल और पानी की टंकी तैयार होने के बावजूद, बिजली कनेक्शन के अभाव में ग्रामीणों को एक साल तक पानी के लिए तरसना पड़ा। विभाग के पास 1.59 लाख रुपये की राशि जमा होने के बाद भी बिजली और जलदाय विभाग के बीच तालमेल की कमी के कारण काम अटका रहा। ग्रामीणों की लगातार गुहार के बावजूद सिस्टम की नींद नहीं टूटी थी।

मामले ने तब तूल पकड़ा जब स्थानीय मीडिया ने इस लापरवाही को प्रमुखता से उठाया। खबरों के प्रकाशन के महज पांच दिन के भीतर ही बिजली विभाग की टीम शनिवार को मौके पर पहुंची और कनेक्शन का काम शुरू कर दिया। जलदाय विभाग के सहायक अभियंता खेमराज बेरवा ने बताया कि रविवार तक मोटर स्टार्टर और सर्विस लाइन लगाकर ट्यूबवेल को पूरी तरह चालू कर दिया जाएगा। बिजली विभाग के सहायक अभियंता अनूप शर्मा ने भी पुष्टि की कि अब कनेक्शन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

इस घटना ने प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब सभी औपचारिकताएं पूरी थीं, तो एक साल तक फाइल किस स्तर पर अटकी रही और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह बड़ा प्रश्न है। इस दौरान ग्रामीणों को निजी स्तर पर पानी का इंतजाम करने के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़े। जनप्रतिनिधियों की चुप्पी ने भी इस पूरे मामले में उनकी भूमिका को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।

अब ग्रामीणों को पानी मिलने की उम्मीद तो जगी है, लेकिन वे अब इस देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में इस तरह की लापरवाही न हो। केवल ट्यूबवेल चालू करना ही काफी नहीं है, बल्कि एक साल तक ग्रामीणों को पानी से वंचित रखने वाली इस व्यवस्था की जवाबदेही तय करना भी आवश्यक है।

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