शिवगंज वार्ड 3 में 15 वोटों की शिफ्टिंग से भाजपा में सियासी घमासान, टिकट की दावेदारी पर संकट
शिवगंज के वार्ड नंबर 3 में मतदाता सूची में 15 नामों के स्थानांतरण को लेकर भाजपा में आंतरिक कलह तेज हो गई है, जिससे टिकट वितरण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
शिवगंज। नगर निकाय चुनाव से पहले शिवगंज में वार्ड नंबर 3 की मतदाता सूची में 15 नामों के कथित स्थानांतरण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस विवाद ने न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भाजपा के भीतर टिकट की दावेदारी को लेकर भी भारी खींचतान पैदा कर दी है। मामला तब और गंभीर हो गया जब भाजपा उम्मीदवार अशोक कुमावत और बीएलओ रमेश कुमार के बयानों में विरोधाभास सामने आया।
अशोक कुमावत का कहना है कि मतदाताओं की शिफ्टिंग पूरी तरह से बीएलओ की जिम्मेदारी है। वहीं, एक कथित ऑडियो में बीएलओ रमेश कुमार यह दावा करते सुने जा सकते हैं कि अशोक कुमावत ने अपने परिवार के 11 सदस्यों के नाम वार्ड 3 में शिफ्ट करने के लिए स्वयं एफिडेविट दिया था। इस विरोधाभास ने पूरे मामले को एक पहेली बना दिया है कि आखिर सत्यापन की प्रक्रिया किस आधार पर पूरी की गई और क्या मौके पर जाकर भौतिक जांच की गई थी।
यह विवाद अब टिकट की राजनीति से सीधे जुड़ गया है। वार्ड 3 से पूर्व पार्षद अशोक कुमावत और दिनेश कुमावत की दावेदारी के बीच, मतदाता सूची का यह मुद्दा पार्टी के भीतर गुटबाजी को और हवा दे रहा है। स्थानीय निवासियों ने भी स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें बाहरी उम्मीदवार मंजूर नहीं है और यदि पार्टी ने स्थानीय भावनाओं को दरकिनार किया, तो इसका विरोध किया जाएगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत जिला कलेक्टर तक पहुंचाई गई है। अब प्रशासनिक जांच में आवेदन पत्र, किराएनामा और भौतिक सत्यापन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी। यह जांच ही तय करेगी कि इन 15 नामों का स्थानांतरण नियमों के दायरे में था या नहीं।
भाजपा नेतृत्व के सामने अब चुनौती केवल टिकट देने की नहीं, बल्कि स्थानीय कार्यकर्ताओं के असंतोष को थामने की भी है। यदि यह विवाद नहीं सुलझा, तो इसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है। फिलहाल, वार्ड 3 भाजपा के लिए संगठन और स्थानीय असंतोष की एक बड़ी अग्निपरीक्षा बन चुका है, जहां हर कदम फूंक-फूंक कर रखने की आवश्यकता है।
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