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अरावली के संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की नजर, 6 से 10 अगस्त तक होगा हाई पावर कमेटी का फील्ड सर्वे

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी अरावली पर्वतमाला की पर्यावरणीय स्थिति और खनन गतिविधियों का जमीनी आकलन करने के लिए 6 से 10 अगस्त तक दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान का दौरा करेगी।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
अरावली के संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की नजर, 6 से 10 अगस्त तक होगा हाई पावर कमेटी का फील्ड सर्वे

जयपुर। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और उसकी पर्यावरणीय अखंडता को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी (एचपीसी) अपना विस्तृत फील्ड सर्वे शुरू करने जा रही है। यह समिति 6 अगस्त से 10 अगस्त तक दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के विभिन्न अरावली क्षेत्रों का दौरा करेगी। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) के महानिदेशक के नेतृत्व में यह टीम क्षेत्र की भू-वैज्ञानिक संरचना, जल संसाधनों और जैव विविधता का बारीकी से अध्ययन करेगी।

समिति का मुख्य उद्देश्य अरावली क्षेत्र में हो रही खनन गतिविधियों, भूमि उपयोग में बदलाव और स्थानीय निवासियों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों का वैज्ञानिक आकलन करना है। इस दौरे के माध्यम से समिति संरक्षण और विकास के बीच एक संतुलन बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को ठोस सुझाव सौंपेगी। आईसीएफआरई ने राजस्थान सरकार से एक वरिष्ठ नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आग्रह किया है ताकि दौरे के दौरान प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चल सकें।

दौरे के दौरान समिति का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहेगा। प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक टीम फील्ड विजिट करेगी। इसके बाद शाम 4:30 बजे से 6:30 बजे तक जनसुनवाई आयोजित की जाएगी, जिसमें पर्यावरणविदों, स्थानीय ग्रामीणों, खदान श्रमिकों, किसान संगठनों और सरकारी अधिकारियों से सुझाव लिए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी हितधारकों की राय को रिपोर्ट में शामिल किया जाए।

समिति का यात्रा कार्यक्रम 6 अगस्त को दिल्ली और गुरुग्राम-फरीदाबाद से शुरू होगा। इसके बाद 7 अगस्त को टीम कोटपूतली, नीमकाथाना और खंडेला होते हुए सरिस्का पहुंचेगी। 8 अगस्त को जयपुर और अजमेर का दौरा प्रस्तावित है, जबकि 9 अगस्त को टीम ब्यावर, राजसमंद और उदयपुर के क्षेत्रों का निरीक्षण करेगी। दौरे का समापन 10 अगस्त को पिंडवाड़ा और माउंट आबू के निरीक्षण के साथ होगा।

यह दौरा अरावली के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समिति द्वारा जुटाई गई जानकारी और जनसुनवाई में प्राप्त आपत्तियों के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी। राज्य प्रशासन को इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि अरावली के पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

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