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झालावाड़

झालावाड़ में गूंजे रफी साहब के सदाबहार नगमे, कलाकारों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

झालावाड़ के अनंग कुमार जैन स्मृति भवन में मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि पर संगीत प्रेमियों और कलाकारों ने उनके गीतों के माध्यम से उन्हें याद किया।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
झालावाड़ में गूंजे रफी साहब के सदाबहार नगमे, कलाकारों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

झालावाड़। हिन्दी सिनेमा के कालजयी पार्श्व गायक मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि के अवसर पर झालावाड़ में एक विशेष संगीतमयी आयोजन किया गया। संगीत मंच परिवार द्वारा अनंग कुमार जैन स्मृति भवन में आयोजित इस कार्यक्रम का शीर्षक एक शाम रफी साहब के नाम रखा गया था। इस सुरमई संध्या में जिले के कई प्रतिभाशाली कलाकारों ने शिरकत की और महान गायक के अमर गीतों को अपनी आवाज देकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम देर रात तक चला और श्रोता संगीत की लहरियों में डूबे रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत नन्ही कलाकार लावण्या द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और रफी साहब के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद डॉ. हेमंत शर्मा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर माहौल को संगीतमय बनाया। आयोजक डॉ. हेमंत शर्मा और प्रभात सक्सेना ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को रफी साहब के रोमांटिक, देशभक्ति और विरह से भरे गीतों से रूबरू कराना था। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मंच पर बलदेव राज भाटिया, कमल चौरसिया, सावित्री विजयवर्गीय, महीपेंद्र सिंह, करण शर्मा, लक्की हाड़ा, दुर्गाशंकर, विवेक सक्सेना, हर्षिता औदिच्या, डॉ. राजेश शर्मा, अजय रावल और सौरभ सोनी जैसे कलाकारों ने एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति दी। लावण्या ने वायलिन वादन के साथ देशभक्ति गीत गाकर उपस्थित लोगों से खूब वाहवाही लूटी। इन प्रस्तुतियों ने रफी साहब के गायन की विविधता को बखूबी दर्शाया।

आकाशवाणी झालावाड़ के उद्घोषक कमल शर्मा ने रफी साहब के जीवन से जुड़े कई प्रेरक प्रसंग साझा किए, जिससे श्रोताओं को उनके व्यक्तित्व के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने का मौका मिला। कार्यक्रम का संचालन प्रवीण भाटिया और करण शर्मा ने किया, जिन्होंने अपनी बातों से कार्यक्रम में निरंतरता बनाए रखी। संगीत की इन धुनों ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया और पुराने दौर की यादें ताजा हो गईं।

इस अवसर पर भारत विकास परिषद, लायंस क्लब और झालावाड़ हेरिटेज जैसे सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। संगीत प्रेमियों की भारी मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि रफी साहब के गीतों का जादू आज भी बरकरार है। कार्यक्रम के अंत तक सभी ने इस सुरमई शाम की सराहना की और इसे एक यादगार आयोजन बताया।

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