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राजस्थान में साइबर अपराधों पर लगाम: 1 लाख से अधिक की ठगी पर अब दर्ज होगी जीरो FIR

राजस्थान में पिछले साढ़े छह महीनों में साइबर ठगी के 387 करोड़ रुपये के मामले सामने आए हैं। इसे देखते हुए सरकार ने 1 लाख रुपये से अधिक के फ्रॉड पर जीरो FIR दर्ज करने का अनिवार्य निर्देश दिया है।

राजस्थान में साइबर अपराधों पर लगाम: 1 लाख से अधिक की ठगी पर अब दर्ज होगी जीरो FIR
राजस्थान में साइबर अपराधों पर लगाम: 1 लाख से अधिक की ठगी पर अब दर्ज होगी जीरो FIR

जयपुर। राजस्थान में साइबर अपराधों का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है, जिससे आम जनता की गाढ़ी कमाई खतरे में है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले साढ़े छह महीनों के भीतर राज्य में साइबर ठगों ने 387 करोड़ रुपये की चपत लगाई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है, ताकि पीड़ितों को त्वरित न्याय मिल सके और जांच में होने वाली देरी को खत्म किया जा सके।

राज्य सरकार ने अब एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव करते हुए निर्देश दिए हैं कि 1 लाख रुपये या उससे अधिक की साइबर ठगी के मामलों में जीरो FIR दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस नई व्यवस्था के तहत, पीड़ित व्यक्ति किसी भी नजदीकी पुलिस थाने में अपनी शिकायत दर्ज करा सकेगा, चाहे घटना कहीं भी हुई हो। इससे क्षेत्राधिकार के विवादों के कारण होने वाली देरी से बचा जा सकेगा और पुलिस तुरंत कार्रवाई शुरू कर सकेगी।

साइबर अपराधी अक्सर पुलिस थानों के बीच क्षेत्राधिकार के उलझाव का फायदा उठाते हैं, जिससे जांच की गति धीमी हो जाती है। जीरो FIR की सुविधा मिलने से शिकायत दर्ज होते ही प्राथमिक जांच शुरू हो जाएगी, जिसे बाद में संबंधित साइबर सेल को स्थानांतरित कर दिया जाएगा। यह कदम जांच प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और अपराधियों तक जल्दी पहुंचने में मददगार साबित होगा।

अधिकारियों का मानना है कि यह निर्णय साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाएगा। समय पर FIR दर्ज होने से पुलिस को संदिग्ध खातों को फ्रीज करने और डिजिटल साक्ष्य जुटाने के लिए अधिक समय मिलेगा, जिससे ठगी गई राशि को वापस पाने की संभावना भी बढ़ जाएगी।

सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की संदिग्ध वित्तीय गतिविधि होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर सूचित करें या अपने नजदीकी पुलिस थाने में संपर्क करें। राज्य पुलिस की साइबर इकाइयों को भी आधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है ताकि वे इन जटिल मामलों को प्रभावी ढंग से सुलझा सकें और पीड़ितों को हर संभव सहायता प्रदान की जा सके।

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