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असम में बाढ़ का कहर: 31 लोगों की मौत, सात लाख से अधिक आबादी प्रभावित

असम में भारी बारिश और नदियों के उफान से 25 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी है और सात लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। सेना और एनडीआरएफ द्वारा बचाव कार्य जारी है।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
असम में बाढ़ से जलमग्न क्षेत्र और बचाव कार्य में जुटी टीमें
असम में बाढ़ से जलमग्न क्षेत्र और बचाव कार्य में जुटी टीमें

गुवाहाटी। असम में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। राज्य में इस वर्ष बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है, जबकि सात लाख से अधिक लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। ऊपरी असम के कई जिलों में गांव, खेत, सड़कें और घर पानी में डूब गए हैं। बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट सहित बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बाढ़ से जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य आवश्यक सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।

बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, गोलाघाट और धेमाजी शामिल हैं। कई गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है। कुछ स्थानों पर पानी का बहाव इतना तेज है कि बचाव दलों को नाव और हेलीकॉप्टर की सहायता से लोगों तक पहुंचने का प्रयास करना पड़ रहा है।

राज्य सरकार के अनुसार, बाढ़ का असर 25 जिलों, 74 राजस्व क्षेत्रों और करीब 1,700 गांवों में देखा गया है। हजारों घरों को आंशिक या पूर्ण नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में पशुधन और मुर्गी पालन भी प्रभावित हुआ है। खेतों में पानी भरने से हजारों हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 95 से अधिक राहत शिविर और सैकड़ों राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में हजारों विस्थापित लोगों ने शरण ली है। प्रशासन की ओर से चावल, दाल, नमक, सरसों का तेल, पेयजल, बच्चों का भोजन और आवश्यक दवाइयां वितरित की जा रही हैं।

हालांकि कई ऐसे गांव भी हैं, जहां सड़कें और संपर्क मार्ग पानी में डूबने के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में कठिनाई हो रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने स्वीकार किया कि कुछ स्थानों तक प्रशासन अभी पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने कहा कि जलस्तर कम होते ही दूरदराज के क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और नुकसान का आकलन करने का काम तेज किया जाएगा।

भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा, पुलिस और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से बचाव अभियान चला रहे हैं। विभिन्न प्रभावित जिलों से अब तक छह हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।

भारतीय सेना की रेड शील्ड डिवीजन के जवानों ने शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट में अभियान चलाकर सैकड़ों लोगों को बाढ़ के पानी से बाहर निकाला है। सेना की मेडिकल टीमों ने प्रभावित लोगों को प्राथमिक उपचार और दवाइयां भी उपलब्ध कराई हैं। दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों का पता लगाने के लिए सेना के हेलीकॉप्टरों से हवाई सर्वेक्षण किया जा रहा है।

बाढ़ के कारण बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के सामने सबसे अधिक परेशानी पैदा हो गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बीमार और चलने-फिरने में असमर्थ लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जाए। राहत शिविरों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की टीमों को तैनात किया गया है।

शिवसागर इस समय सबसे अधिक प्रभावित जिला बताया जा रहा है। जिले में लाखों लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद जोरहाट और चराइदेव में बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। कई परिवारों को अपना घर छोड़कर स्कूलों, सामुदायिक भवनों और प्रशासन द्वारा बनाए गए राहत शिविरों में जाना पड़ा है।

बाढ़ के पानी ने कई स्थानों पर सड़क, पुल, तटबंध और अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया है। ऊपरी असम में रेल यातायात पर भी प्रभाव पड़ा है। कुछ स्थानों पर रेलवे ट्रैक पानी में डूबने के कारण ट्रेन सेवाओं में बदलाव करना पड़ा और यात्रियों को वैकल्पिक साधनों से उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया।

राज्य की प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार चिंता का कारण बना हुआ है। ब्रह्मपुत्र नदी नीमातीघाट में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बुरही दिहिंग और धनसिरी सहित कई सहायक नदियों का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। कुछ स्थानों पर दिखौ और दिसांग नदियां अपने उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर बहने की जानकारी सामने आई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और आजीविका को दोबारा स्थापित करने में हरसंभव सहायता करेगी। बाढ़ में दस्तावेज खोने वाले लोगों के प्रमाण-पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेज दोबारा बनवाने के लिए भी विशेष व्यवस्था किए जाने का आश्वासन दिया गया है।

राज्य प्रशासन ने जिला उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि बाढ़ से घरों, फसलों, पशुधन और सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वेक्षण कराया जाए। जलस्तर कम होने के बाद प्रभावित परिवारों को सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा और पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने असम और मेघालय में आने वाले दिनों में भी व्यापक बारिश की संभावना जताई है। कई स्थानों पर भारी और कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है। विभाग ने गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी जताई है।

मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वोत्तर असम और आसपास के क्षेत्रों में बना चक्रवाती परिसंचरण बारिश की गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है। 28 जुलाई तक पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में बारिश जारी रहने की संभावना है। इससे पहले से जलमग्न क्षेत्रों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को तेज बहाव वाली नदियों, जलमग्न सड़कों और कमजोर पुलों से दूर रहने तथा जिला प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।

असम में हर वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ आती है, लेकिन इस बार ऊपरी असम के कुछ क्षेत्रों में अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। प्रशासन का कहना है कि पानी उतरने के बाद ही जनहानि, मकानों, फसलों, सड़कों और अन्य संपत्ति को हुए वास्तविक नुकसान का पूरा आकलन हो सकेगा।

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