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सीकर में एसटीपी प्लांट के निरीक्षण के दौरान गरमाई सियासत, कांग्रेस-बीजेपी कार्यकर्ताओं में हुई तीखी बहस

सीकर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निरीक्षण के दौरान स्थानीय निवासियों की नाराजगी और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
सीकर में एसटीपी प्लांट के निरीक्षण के दौरान गरमाई सियासत, कांग्रेस-बीजेपी कार्यकर्ताओं में हुई तीखी बहस

सीकर। सीकर के रोडवेज बस डिपो के पास स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के निकट वन विभाग की जमीन पर बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का मंगलवार को अधिकारियों द्वारा किया गया निरीक्षण हंगामे में बदल गया। जिला प्रशासन, नगर परिषद और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों की टीम जब प्लांट की स्थिति और वहां से आने वाली दुर्गंध की जांच करने पहुंची, तो बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी भी वहां एकत्रित हो गए।

कॉलोनी के निवासियों ने अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए प्लांट को रिहायशी इलाके से हटाने की पुरजोर मांग की। निवासियों का कहना है कि प्लांट से उठने वाली दुर्गंध के कारण उनका जीना मुहाल हो गया है और उन्हें हर दिन भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी दौरान वहां मौजूद कांग्रेस के निवर्तमान पार्षद अशोक चौधरी और भाजपा कार्यकर्ता यशस्वी राठौड़ के बीच प्लांट के निर्माण और प्रबंधन को लेकर तीखी बहस हो गई। दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया।

यह निरीक्षण 25 जून 2026 को सीकर की स्थाई लोक अदालत द्वारा दिए गए आदेशों के अनुपालन में किया गया था। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे स्थानीय निवासियों की मौजूदगी में मौके का मुआयना करें। यदि जांच में दुर्गंध की समस्या सही पाई जाती है, तो नगर परिषद आयुक्त को प्लांट को रिहायशी इलाके से कम से कम 500 मीटर दूर स्थानांतरित करने की स्वतंत्रता दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि निरीक्षण के बाद तैयार की गई रिपोर्ट को अदालत में पेश किया जाएगा।

गौरतलब है कि 5 एमएलडी क्षमता वाले इस एसटीपी प्लांट का शिलान्यास फरवरी 2021 में किया गया था और इससे करीब 12,000 सीवरेज कनेक्शन जुड़े हुए हैं। महेंद्र सिंह, किस्तूर और हरफूल सहित कॉलोनी के कई निवासियों ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए अदालत में वाद दायर किया था। अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि वे शहर की सीवरेज व्यवस्था को सुचारू रखने के साथ-साथ स्थानीय निवासियों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का समाधान कैसे करते हैं।

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