चूरू के सात स्कूलों में विधिक साक्षरता शिविर: नशे के खिलाफ न्यायिक अधिकारियों ने दी सीख
ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे अभियान के तहत चूरू के सात विद्यालयों में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए, जिसमें न्यायिक अधिकारियों ने छात्रों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया।

चूरू। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में मंगलवार को चूरू जिले के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में एक विशेष जागरूकता अभियान का संचालन किया गया। ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे के अंतर्गत आयोजित इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले नुकसानों के प्रति सचेत करना और उन्हें कानूनी रूप से जागरूक बनाना था। जिला एवं सेशन न्यायाधीश सोनिका पुरोहित के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों ने छात्रों से सीधा संवाद स्थापित किया।
शिविरों के दौरान अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि नशा किसी भी प्रकार की आधुनिकता या स्टाइल का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उज्ज्वल भविष्य को भी नष्ट करने वाला एक घातक मार्ग है। छात्रों को अपने सपनों को प्राथमिकता देने और नशे जैसी कुरीतियों को पूरी तरह से नकारने का संदेश दिया गया। यह प्रयास युवाओं को सही दिशा दिखाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा में स्वस्थ रूप से बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया है।
इस जागरूकता अभियान के तहत जिले के सात प्रमुख स्कूलों में न्यायिक अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश पवन कुमार वर्मा ने मॉडर्न बेबी हैप्पी स्कूल में, जबकि पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश बलवंत सिंह भारी ने इंडियन पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों को संबोधित किया। इसी क्रम में अपर जिला न्यायाधीश राजेन्द्र चौधरी ने गीतांजलि पब्लिक स्कूल और स्पेशल न्यायाधीश कमल सोनी ने सेंट विक्टोरिया मेमोरियल स्कूल में छात्रों को जागरूक किया।
अभियान के अन्य सत्रों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव कृष्ण राकेश कांवत ने जाकिर हुसैन स्कूल में, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार पूनिया ने श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी बाल विहार में और न्यायिक मजिस्ट्रेट पिंकी मीणा ने गाजसर स्थित रॉयल एसआरके पब्लिक स्कूल में कार्यक्रम का नेतृत्व किया। इन सभी सत्रों में अधिकारियों ने कानूनी प्रावधानों और सामाजिक दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।
न्यायिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि युवा पीढ़ी ही देश का भविष्य है और उन्हें नशे के जाल से बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है। शिविरों के माध्यम से छात्रों को यह विश्वास दिलाया गया कि वे अपनी ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों और शिक्षा में लगाकर एक बेहतर जीवन का निर्माण कर सकते हैं। इस तरह के आयोजनों से जिले में नशे के विरुद्ध एक सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद मिलेगी।
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