परीक्षा पेपर लीक के विरोध में संसद मार्च, पुलिस ने किया लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल
क्लाइमेट जस्टिस पार्टी के नेतृत्व में हजारों प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च किया। पेपर लीक के विरोध में हुए इस प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब हजारों प्रदर्शनकारियों ने परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे पर संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। क्लाइमेट जस्टिस पार्टी के नेतृत्व में कम से कम 20,000 लोग जंतर-मंतर पर एकत्र हुए और संसद भवन की ओर बढ़ने लगे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
यह प्रदर्शन हाल के दिनों में हुई कई राष्ट्रीय परीक्षाओं के पेपर लीक होने के बाद छात्रों और युवाओं में बढ़ते आक्रोश का परिणाम है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार इस मामले में जवाबदेही तय करे और पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। मार्च में शामिल लोगों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता की मांग को लेकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन से पहले कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आंदोलन समाप्त करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी थीं, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया में बड़े बदलाव की मांग शामिल है। यह मुद्दा संसद के दोनों सदनों में भी गूंजा, जहां विपक्षी दलों ने सरकार को घेरते हुए इस पर चर्चा की मांग की। हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित करना पड़ा।
सरकार का कहना है कि वह परीक्षा सुरक्षा को लेकर गंभीर है और आवश्यक कदम उठा रही है, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे नाकाफी बता रहे हैं। सुरक्षा बलों ने संसद और आसपास के सरकारी कार्यालयों के बाहर घेराबंदी कड़ी कर दी है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। यह आंदोलन युवाओं के भविष्य और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठ रहे गंभीर सवालों को दर्शाता है।
संसद का मानसून सत्र चल रहा है और पेपर लीक का मुद्दा सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का मुख्य केंद्र बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे। प्रशासन अब स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है और किसी भी बड़े जमावड़े को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
प्रतिक्रियाएं
टिप्पणियां
अभी कोई स्वीकृत टिप्पणी नहीं है।
