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सुमेरपुर: गौशाला में बना 62 फीट ऊंचा पक्षी महल, बेजुबानों को मिला नया आशियाना

कोलीवाड़ा की श्रीराम गौशाला में जनसहयोग और महिला शक्ति के संकल्प से 4.50 लाख की लागत से 62 फीट ऊंचा भव्य पक्षी आश्रय बनकर तैयार हुआ है।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
सुमेरपुर: गौशाला में बना 62 फीट ऊंचा पक्षी महल, बेजुबानों को मिला नया आशियाना

सुमेरपुर। कोलीवाड़ा स्थित श्रीराम गौशाला अब केवल गौसेवा का केंद्र नहीं, बल्कि प्रकृति और बेजुबान पक्षियों के संरक्षण का एक अनूठा तीर्थ बन गई है। गौशाला परिसर में जनसहयोग और दानदाताओं की उदारता से 62 फीट ऊंचा भव्य पक्षी आश्रय बनकर तैयार हुआ है। मंदिरनुमा आकृति और शीर्ष पर स्थापित आकर्षक मोर के कारण यह संरचना राहगीरों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले लोग इसे देखकर रुकने और इसकी तस्वीरें लेने को मजबूर हो जाते हैं।

लगभग 4.50 लाख रुपए की लागत से निर्मित यह पक्षी आश्रय सेवा और संवेदना का जीवंत प्रतीक है। 20 फीट ऊंचे मजबूत स्तंभों पर टिकी यह संरचना हजारों पक्षियों के लिए एक सुरक्षित बसेरा प्रदान करेगी। इस अनूठी पहल को समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा सराहा जा रहा है, जो इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहे हैं।

इस प्रेरक अभियान को सफल बनाने में श्री शिव महिला मंडल और श्री जगन्नाथ महिला मंडल का संयुक्त संकल्प मुख्य रहा। मंजू बहन कुमावत और गीताबेन कुमावत की प्रेरणा से शुरू हुए इस कार्य को गौशाला सेवा समिति के सदस्यों ने अथक परिश्रम से पूरा किया। निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष मूलचंद नामदेव और शिवलाल परिहार ने निरंतर निगरानी रखी, जिससे यह भव्य स्वरूप साकार हो सका।

हाल ही में शिवलाल परिहार, खीमाराम कुमावत, पुखराज कुमावत और मोहनदास वैष्णव ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर अंतिम व्यवस्थाओं का जायजा लिया। समिति का मानना है कि गौसेवा के साथ-साथ पक्षियों और प्रकृति का संरक्षण भी अत्यंत आवश्यक है। यह स्थान आने वाले समय में श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों के लिए जैव विविधता और जीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देने वाला केंद्र बनेगा।

समिति अध्यक्ष धीरज सांखला, चतुर्भुज शर्मा, नरेंद्र कुमार पुरोहित, भंवरलाल परमार सहित पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों से यह प्रकल्प पूरा हुआ है। अब शीघ्र ही एक भव्य समारोह में इसका लोकार्पण किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र के गणमान्य नागरिक और दानदाता शामिल होंगे। यह निर्माण न केवल पक्षियों के लिए आवास है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सेवा और प्रकृति प्रेम की एक मिसाल भी है।

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