फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर जयपुर के डॉक्टर से 3.81 करोड़ की ठगी, नागपुर से आरोपी गिरफ्तार
टेलीग्राम ग्रुप से जोड़कर बनाया फर्जी ट्रेडिंग अकाउंट, शुरुआत में छोटा मुनाफा दिखाकर जीता भरोसा

जयपुर। राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम शाखा ने फॉरेक्स ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर जयपुर के एक डॉक्टर से कथित रूप से 3 करोड़ 81 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने आरोपी को महाराष्ट्र के नागपुर से पकड़ा और ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लेकर आई। गिरफ्तार आरोपी की पहचान रक्षक राहुल गजभिये के रूप में हुई है। उस पर साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर भेजने के लिए गिरोह को बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है।
पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर गिरोह के मुख्य संचालकों, अन्य सदस्यों और ठगी की रकम के नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
पुलिस के अनुसार, जयपुर के मालवीय नगर निवासी एक डॉक्टर ऑनलाइन निवेश के विकल्प तलाश रहे थे। उन्होंने गूगल पर फॉरेक्स ट्रेडिंग और निवेश से संबंधित जानकारी खोजी थी।
इसके बाद कथित साइबर ठगों ने डॉक्टर से संपर्क किया और खुद को ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जुड़ा प्रतिनिधि बताया। आरोपियों ने डॉक्टर को ‘CMC Global CS’ नाम के एक टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ दिया।
ठगों ने रजिस्ट्रेशन और ट्रेडिंग खाता खोलने के नाम पर डॉक्टर से आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य व्यक्तिगत जानकारी मांगी। इसके बाद उनके नाम से एक फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग अकाउंट बनाकर लॉगिन आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि ठगों ने शुरुआत में डॉक्टर से छोटी रकम निवेश करवाई। इस रकम पर उन्हें कुछ मुनाफा भी लौटाया गया, जिससे डॉक्टर को ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर विश्वास हो गया।
इसके बाद आरोपियों ने फॉरेक्स ट्रेडिंग में भारी मुनाफा होने का दावा करते हुए डॉक्टर को बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया।
फर्जी ट्रेडिंग पोर्टल पर डॉक्टर के निवेश और कथित मुनाफे की रकम लगातार बढ़ती हुई दिखाई जाती रही। पोर्टल पर दिखाई जा रही बढ़ी हुई राशि को देखकर डॉक्टर ने अलग-अलग चरणों में कुल 3 करोड़ 81 लाख रुपये निवेश कर दिए।
डॉक्टर को कुछ समय बाद ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और निवेश प्रक्रिया पर संदेह हुआ। उन्होंने अपने खाते में दिखाई जा रही रकम निकालने का प्रयास किया।
आरोप है कि निकासी का अनुरोध करते ही साइबर ठगों ने डॉक्टर को टेलीग्राम ग्रुप से हटा दिया। ग्रुप की चैट हिस्ट्री भी डिलीट कर दी गई और आरोपियों ने डॉक्टर से सभी प्रकार का संपर्क बंद कर दिया।
इसके बाद डॉक्टर को अपने साथ हुई साइबर धोखाधड़ी का पता चला। उन्होंने पांच अक्टूबर 2025 को राजस्थान पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम शाखा ने मामले की तकनीकी जांच शुरू की। पुलिस टीम ने ठगी की रकम प्राप्त करने वाले बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, टेलीग्राम अकाउंट, इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया।
जांच के दौरान ठगी की रकम से जुड़े बैंक खातों का नेटवर्क महाराष्ट्र के नागपुर तक पहुंचा। इसके बाद पुलिस टीम ने नागपुर में कार्रवाई करते हुए आरोपी रक्षक राहुल गजभिये को गिरफ्तार किया।
पुलिस का आरोप है कि गिरफ्तार व्यक्ति ने साइबर ठगी करने वाले गिरोह को बैंक खाते उपलब्ध कराए थे। इन्हीं खातों के माध्यम से डॉक्टर से ठगी गई रकम प्राप्त करने और आगे स्थानांतरित करने का काम किया गया।
साइबर क्राइम शाखा को आशंका है कि इस गिरोह ने राजस्थान के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी लोगों को ऑनलाइन निवेश और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर ठगा हो सकता है।
पुलिस गिरफ्तार आरोपी के बैंक खातों, मोबाइल फोन, संपर्कों और लेनदेन की जांच कर रही है। उसके साथ जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने का भी प्रयास किया जा रहा है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह का मुख्य संचालक कौन है, फर्जी ट्रेडिंग पोर्टल कहां से संचालित किया जा रहा था और ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई।
पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश करने के साथ ठगी की रकम को जब्त या फ्रीज कराने की कार्रवाई भी कर सकती है।
ऑनलाइन निवेश से जुड़ी साइबर ठगी में अपराधी अक्सर लोगों को सोशल मीडिया, व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ते हैं। इसके बाद उन्हें किसी फर्जी वेबसाइट या मोबाइल एप्लिकेशन पर ट्रेडिंग अकाउंट उपलब्ध कराया जाता है।
इन फर्जी प्लेटफॉर्म पर अपराधी निवेश और मुनाफे की राशि को अपनी सुविधा के अनुसार बढ़ाकर दिखा सकते हैं। पीड़ित को लगता है कि उसका निवेश तेजी से बढ़ रहा है, जबकि वास्तविकता में कोई निवेश नहीं किया जाता।
जब पीड़ित बड़ी रकम निकालने का प्रयास करता है तो उससे टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट या अन्य शुल्क के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगी जाती है। रकम देने से इनकार करने पर उसका अकाउंट बंद कर दिया जाता है और अपराधी संपर्क समाप्त कर देते हैं।
पुलिस ने लोगों से ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग, शेयर बाजार, क्रिप्टोकरेंसी और निवेश के नाम पर मिलने वाले अनजान संदेशों से सावधान रहने की अपील की है।
किसी भी व्यक्ति या संस्था को आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते, ओटीपी और अन्य गोपनीय जानकारी देने से पहले उसकी वैधता की जांच करना आवश्यक है।
केवल किसी वेबसाइट या मोबाइल एप्लिकेशन पर अधिक मुनाफा दिखाई देने से निवेश को वास्तविक नहीं माना जाना चाहिए। निवेश करने से पहले संबंधित संस्था का पंजीकरण और नियामक मंजूरी जांचनी चाहिए।
साइबर ठगी होने पर पीड़ित को तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना देनी चाहिए। इसके साथ ही साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराकर नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करना चाहिए।
समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम जिन खातों में भेजी गई है, उन्हें फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ जारी है। जांच में गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए बैंक खातों के संबंध में और जानकारी सामने आने की संभावना है।
फिलहाल गिरफ्तार व्यक्ति पर लगाए गए आरोप पुलिस जांच का हिस्सा हैं। मामले में अंतिम निर्णय अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
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