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जयपुर स्कूल छात्रा मौत मामले में नया CCTV आया सामने, परिवार ने लगाए बुलिंग के आरोप

नौ वर्षीय छात्रा के परिवार ने जांच और आरोपपत्र पर उठाए सवाल, स्कूलों में सख्त एंटी-बुलिंग व्यवस्था लागू करने की मांग

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
जयपुर स्कूल छात्रा मौत मामले में नया CCTV आया सामने, परिवार ने लगाए बुलिंग के आरोप

जयपुर। जयपुर के एक निजी स्कूल में नौ वर्षीय छात्रा की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। छात्रा के परिवार ने कक्षा का नया सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करते हुए दावा किया है कि घटना से पहले बच्ची को सहपाठियों द्वारा परेशान किया गया था। परिवार का आरोप है कि बच्ची ने मदद मांगने और अपनी परेशानी बताने का प्रयास किया, लेकिन समय रहते उचित हस्तक्षेप नहीं किया गया। हालांकि परिवार की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

परिवार के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में बच्ची शुरुआत में सामान्य रूप से कक्षा की गतिविधियों में भाग लेते हुए दिखाई देती है। इसके बाद सहपाठियों के साथ हुई एक कथित घटना के बाद उसके व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई देता है। परिवार का दावा है कि बच्ची तनाव में थी और उसने सहायता लेने का प्रयास किया, लेकिन उसकी स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया।

यह घटना एक नवंबर 2025 की है। कक्षा चार में पढ़ने वाली छात्रा स्कूल की इमारत से गिरने के बाद गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। घटना के बाद परिवार ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस में मामला दर्ज कराया था।

मामले ने उस समय भी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग व्यवस्था और बुलिंग की शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब नया फुटेज सामने आने के बाद मामला फिर से सार्वजनिक चर्चा में आ गया है।

छात्रा के माता-पिता का कहना है कि पुलिस की ओर से दाखिल किया गया आरोपपत्र अधूरा है और मामले से जुड़े सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं की गई। परिवार ने स्कूल प्रबंधन और अन्य संबंधित लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

परिवार ने यह भी कहा कि जांच के दौरान करीब आठ महीने में तीन जांच अधिकारी बदले गए। उन्होंने अदालत से आरोपपत्र में कथित कमियों का संज्ञान लेने और मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।

परिवार का आरोप है कि सीसीटीवी फुटेज में बच्ची परेशान दिखाई दे रही थी, लेकिन कक्षा में मौजूद शिक्षक ने उसकी स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। परिवार ने मांग की है कि शिक्षक और स्कूल प्रबंधन की भूमिका की भी कानूनी रूप से जांच की जाए।

माता-पिता ने कहा कि स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी केवल परिवार की नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों की भी होती है। उन्होंने मांग की कि बच्चों की शिकायतों को दर्ज करने और उन पर तत्काल कार्रवाई करने के लिए स्कूलों में एक प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।

संयुक्त अभिभावक संघ ने भी मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है। संगठन ने स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति, उनकी योग्यता, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों और नियामक प्रावधानों के पालन की जांच करने की मांग उठाई है।

अभिभावक संगठन का कहना है कि यह मामला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है। संगठन ने स्कूलों में योग्य काउंसलर नियुक्त करने, शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत करने और बुलिंग की घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग की।

पुलिस ने मामले की जांच के दौरान घटनास्थल, स्कूल में उपलब्ध सुरक्षा व्यवस्थाओं, सीसीटीवी फुटेज और घटना के बाद स्कूल प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों की पड़ताल की थी। फरवरी 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, जांच के आधार पर स्कूल के प्रबंधन और शिक्षण स्टाफ से जुड़े लोगों के खिलाफ आरोपपत्र तैयार किया गया था।

रिपोर्टों के अनुसार, आरोपपत्र में भारतीय न्याय संहिता की लापरवाही से मौत और साक्ष्य से संबंधित धाराओं का उल्लेख किया गया था। परिवार का कहना है कि इसके बावजूद जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल नहीं किया गया।

मामले के बाद स्कूलों में बच्चों के साथ होने वाली बुलिंग को रोकने के लिए सख्त व्यवस्था लागू करने की मांग तेज हो गई है। अभिभावकों का कहना है कि कई बच्चे डर या दबाव के कारण अपने साथ हो रही घटनाओं की जानकारी परिवार और शिक्षकों को नहीं दे पाते।

विशेषज्ञों के अनुसार स्कूलों में बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, पढ़ाई से दूरी, स्कूल जाने से डर, चुप रहना या तनाव जैसे संकेतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। स्कूलों में प्रशिक्षित काउंसलर, गोपनीय शिकायत व्यवस्था और नियमित संवाद से ऐसी घटनाओं की पहचान समय रहते की जा सकती है।

नए सीसीटीवी फुटेज के सामने आने के बाद यह सवाल फिर उठ रहा है कि स्कूलों में बच्चों की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है। परिवार ने मामले में सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई और स्वतंत्र जांच की मांग दोहराई है।

फिलहाल फुटेज को लेकर लगाए गए आरोप परिवार के दावे हैं और मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत तथा जांच एजेंसियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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