ऑल इंडिया एलआईसी ओबीसी वेलफेयर एसोसिएशन की नई कमान, डी. श्रीनिवास राव बने अध्यक्ष
ऑल इंडिया एलआईसी ओबीसी वेलफेयर एसोसिएशन के 10वें अधिवेशन में नई कार्यकारिणी का गठन हुआ, जिसमें डी. श्रीनिवास राव और योगेंद्र सिंह चौधरी को प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

जयपुर। ऑल इंडिया एलआईसी ओबीसी वेलफेयर एसोसिएशन के 10वें अखिल भारतीय अधिवेशन के दौरान संगठन की नई कार्यकारिणी का विधिवत गठन किया गया। इस महत्वपूर्ण चुनाव प्रक्रिया में डी. श्रीनिवास राव को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगेंद्र सिंह चौधरी को राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर चुना गया। यह नई टीम संगठन को नई दिशा देने और ओबीसी कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
नई कार्यकारिणी में संगठन के विभिन्न पदों पर अनुभवी सदस्यों को शामिल किया गया है। वासुदेव नन्दी, राकेश कुमार, देवनारायण गुर्जर, पी.एस. चौहान और बलीराम नरातने को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अतिरिक्त, चन्द्रप्रकाश, राजेश कसोदनिया, ओम प्रकाश गवांण्डे, विजय कुमार गंगापुत्र और जयवंत नजन को संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है, जबकि बलबीर सिंह को कोषाध्यक्ष के रूप में चुना गया है। चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए एस.एस. पाल, रजय कुमार और राकेश यादव को निर्वाचक मंडल में शामिल किया गया था।
पदभार ग्रहण करने के बाद नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य ओबीसी कर्मचारियों के कल्याण, उन्हें उचित प्रतिनिधित्व दिलाने और उनके संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर निरंतर संघर्ष करना है। पदाधिकारियों ने विश्वास दिलाया कि वे कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे।
इस अवसर पर ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक एलआईसी डवलपमेंट ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसियेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.एल. मंडीवाल ने नई टीम को बधाई दी। उन्होंने विकास अधिकारी संवर्ग की सेवा नियमों में व्याप्त विसंगतियों को लेकर एक विस्तृत डोजियर नई कार्यकारिणी को सौंपा। इस डोजियर में विशेष रूप से प्रदर्शन आधारित सेवा प्रावधानों और टर्मिनेशन क्लॉज से जुड़ी जटिलताओं का उल्लेख किया गया है, जो विकास अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
बी.एल. मंडीवाल ने अपने संबोधन में कहा कि विकास अधिकारी संवर्ग की समस्याओं का संवैधानिक आधार पर समाधान निकालना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि कर्मचारियों के हितों का संरक्षण न केवल उनके लिए लाभकारी है, बल्कि यह निगम की संस्थागत मजबूती के लिए भी अनिवार्य है। नई कार्यकारिणी ने इन मुद्दों को संस्थागत स्तर पर उठाने और समाधान खोजने का आश्वासन दिया है।
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