हाईकोर्ट की सख्ती: रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया में सर्वे तेज, बाणगंगा के 10 किमी बहाव क्षेत्र पर अवैध कब्जे का खुलासा
हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासन ने रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया में 57 गांवों में व्यापक सर्वे शुरू किया है। शुरुआती जांच में बाणगंगा नदी के 10 किलोमीटर से अधिक बहाव क्षेत्र में खेती, फार्महाउस और अन्य निर्माणों के रूप में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण सामने आए हैं।

जयपुर। राजधानी की प्यास बुझाने वाले ऐतिहासिक रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया में वर्षों से जारी अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है। हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने 57 गांवों में एक व्यापक संयुक्त सर्वे शुरू किया है, जिसका उद्देश्य बांध के बहाव क्षेत्र को अवैध कब्जों से मुक्त कराना है। राजस्व और जल संसाधन विभाग की टीमें मौके पर जाकर राजस्व रिकॉर्ड और धरातल की स्थिति का मिलान कर रही हैं।
सर्वे के शुरुआती दौर में ही चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बाणगंगा नदी और उसकी सहायक नदियों, जैसे माधोवेणी और गोमती के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण पाए गए हैं। जल संसाधन विभाग द्वारा किए गए करीब 20 किलोमीटर के निरीक्षण में 10 किलोमीटर से अधिक का हिस्सा ऐसा मिला है, जहां नदी का बहाव क्षेत्र पूरी तरह से गायब हो चुका है। यहां खेती, मेड़बंदी, तारबंदी और ट्यूबवेल के अलावा कई पक्के निर्माण भी किए गए हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, कैचमेंट क्षेत्र में बने फार्महाउस, रिसॉर्ट, होटल और अन्य व्यावसायिक निर्माणों की भी गहन जांच की जा रही है। जमवारामगढ़, विराटनगर, शाहपुरा और आमेर उपखंड के राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मौके पर जाकर प्राकृतिक बहाव का सत्यापन करें। हाईकोर्ट ने प्रशासन को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि अतिक्रमण करने वाले प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम भी रिपोर्ट में शामिल किए जाएं, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
इस अभियान में जमवारामगढ़ और आंधी तहसील के 57 गांवों को शामिल किया गया है, जिनमें से आधे से अधिक गांव धौला उप-तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। पटवारियों और गिरदावरों को मौका रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य नदी के उन रास्तों को फिर से बहाल करना है, जो वर्षों से अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए थे। यह प्रक्रिया बांध में पानी की आवक सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सर्वे की रिपोर्ट तैयार होने के बाद प्रशासन आगे की कानूनी कार्रवाई की रूपरेखा तय करेगा। इस कार्रवाई को शहर की जल सुरक्षा के लिए एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हाईकोर्ट के निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाएगा ताकि रामगढ़ बांध को उसका खोया हुआ गौरव वापस मिल सके।
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