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बापटला में श्रवण बाधित छात्रों के लिए खुलेगा नया डिग्री कॉलेज

आंध्र प्रदेश सरकार ने श्रवण बाधित छात्रों के लिए एक समर्पित डिग्री कॉलेज को मंजूरी दी है, जिसमें बी.कॉम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
बापटला में श्रवण बाधित छात्रों के लिए खुलेगा नया डिग्री कॉलेज

बापटला। आंध्र प्रदेश के बापटला में समावेशी शिक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने श्रवण बाधित छात्रों के लिए एक विशेष डिग्री कॉलेज खोलने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। यह नया संस्थान शैक्षणिक सत्र 2026-27 से अपना कार्य शुरू करेगा, जिससे उन छात्रों को उच्च शिक्षा का अवसर मिलेगा जो अब तक इंटरमीडिएट के बाद अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए संघर्ष कर रहे थे।

कॉलेज की शुरुआत 30 सीटों के साथ बी.कॉम (कंप्यूटर एप्लीकेशन) पाठ्यक्रम से होगी। छात्रों को आधुनिक तकनीक से लैस करने के उद्देश्य से इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रमाणन पाठ्यक्रम भी शामिल किए गए हैं। भविष्य में इस संस्थान का विस्तार करने की योजना है, जिसके तहत बी.ए. और बी.एस.सी. जैसे अन्य स्नातक कार्यक्रमों को भी शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है।

यह पहल वेदुल्लापल्ली स्थित सरकारी आवासीय स्कूल और जूनियर कॉलेज की सफलता पर आधारित है, जो 1987 से श्रवण बाधित छात्रों के जीवन को संवार रहा है। 1999 में इंटरमीडिएट पाठ्यक्रम शुरू होने के बाद से ही इस संस्थान ने बोर्ड परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम देकर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता साबित की है। यहां के पूर्व छात्र आज सरकारी विभागों और निजी कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जो छात्रों की सीखने की अद्भुत क्षमता को दर्शाता है।

राज्य भर में हर साल लगभग 450 श्रवण बाधित छात्र इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं, लेकिन सरकारी डिग्री कॉलेज के अभाव में कई छात्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को मजबूर थे। नया कॉलेज इस कमी को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। जिला प्रशासन ने राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार कॉलेज को समय पर शुरू करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा, यह संस्थान छात्रों को वेल्डिंग, बढ़ईगीरी और कंप्यूटर जैसे तकनीकी कौशल में भी प्रशिक्षित करता है। खेलकूद में भी यहां के छात्र सक्रिय हैं और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की आकांक्षा रखते हैं। उच्च शिक्षा के द्वार खुलने से इन छात्रों को न केवल पेशेवर करियर बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि वे आत्मनिर्भर होकर समाज में अपनी भागीदारी भी सुनिश्चित कर सकेंगे।

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