भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता लागू: 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात को मिलेगा शुल्क-मुक्त बाजार
पहले ही दिन ब्रिटेन भेजी गई 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की खेप, कपड़ा, आभूषण, चमड़ा, समुद्री उत्पाद और इंजीनियरिंग उद्योग को बड़ा लाभ

नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से औपचारिक रूप से लागू हो गया है। इस समझौते के साथ दोनों देशों के बीच सामाजिक सुरक्षा से संबंधित डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन भी प्रभावी हो गया। केंद्र सरकार ने इसे भारत-ब्रिटेन आर्थिक संबंधों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा है कि इससे व्यापार, निवेश, सेवाओं और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
समझौते के लागू होने से भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शून्य आयात शुल्क की सुविधा मिलेगी। इससे कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री उत्पाद, रसायन, दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक सामान और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों से जुड़े भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
समझौते के पहले दिन भारत के 20 से अधिक बंदरगाहों, हवाई अड्डों, इनलैंड कंटेनर डिपो, विशेष आर्थिक क्षेत्रों और कारखानों से ब्रिटेन के लिए 50 से अधिक निर्यात खेप रवाना की गईं। इन वस्तुओं का कुल मूल्य 14 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक बताया गया है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 1,200 करोड़ रुपये से अधिक बैठता है।
मुंद्रा, न्हावा शेवा और चेन्नई बंदरगाह के साथ मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद के एयर कार्गो परिसरों से भी ब्रिटेन के लिए वस्तुएं भेजी गईं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, दवाइयां, रत्न एवं आभूषण और अन्य विनिर्मित वस्तुएं शामिल रहीं। निर्यातकों को समझौते के तहत मिलने वाली रियायती शुल्क व्यवस्था का लाभ पहले दिन से ही दिया गया।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता दोनों देशों के रिश्तों में एक निर्णायक पड़ाव है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों, विनिर्माताओं और निर्यातकों को ब्रिटेन जैसे विकसित बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का बेहतर अवसर मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी समझौते के लागू होने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंध अधिक मजबूत होंगे। सरकार का मानना है कि शुल्क समाप्त होने से भारतीय उत्पादों की कीमत ब्रिटेन के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी होगी और बांग्लादेश, वियतनाम तथा अन्य निर्यातक देशों के मुकाबले भारतीय कंपनियों की स्थिति मजबूत हो सकेगी।
व्यापार समझौता केवल वस्तुओं के आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी, व्यावसायिक सेवाओं, वित्तीय सेवाओं, शिक्षा, दूरसंचार और पेशेवर सेवाओं से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। भारतीय आईटी कंपनियों, सलाहकारों, इंजीनियरों, वास्तुकारों और अन्य पेशेवरों के लिए ब्रिटेन में काम करने के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
समझौते से जुड़े सामाजिक सुरक्षा प्रावधान के तहत अस्थायी नियुक्ति पर ब्रिटेन जाने वाले पात्र भारतीय पेशेवरों को पांच वर्ष तक दोहरी सामाजिक सुरक्षा राशि जमा करने से छूट मिलेगी। अभी कई भारतीय कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को भारत में सामाजिक सुरक्षा योगदान देने के साथ ब्रिटेन की नेशनल इंश्योरेंस प्रणाली में भी भुगतान करना पड़ता था। नई व्यवस्था से कंपनियों की लागत कम होने और भारतीय पेशेवरों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है।
भारत की ओर से ब्रिटेन को भी कई क्षेत्रों में चरणबद्ध शुल्क रियायतें दी जाएंगी। इनमें चुनिंदा वाहन, मशीनरी, चिकित्सा उपकरण, वित्तीय सेवाएं, शिक्षा, बीमा और पेशेवर सेवाएं शामिल हैं। ब्रिटेन में बनी कुछ महंगी कारों और शराब पर आयात शुल्क धीरे-धीरे कम किया जाएगा, लेकिन इसका लाभ सभी उत्पादों पर तुरंत लागू नहीं होगा। वाहनों के लिए निर्धारित कोटा रहेगा, जबकि शराब की अंतिम खुदरा कीमत पर राज्यों के उत्पाद शुल्क और अन्य करों का प्रभाव भी जारी रहेगा।
ब्रिटेन ने तत्काल प्रभाव से बड़ी संख्या में उत्पाद श्रेणियों पर आयात शुल्क समाप्त कर दिया है। वहीं भारत ने कुछ उत्पादों पर शुल्क तत्काल खत्म किया है और कई अन्य उत्पादों पर इसे आने वाले वर्षों में चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। कृषि और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े कुछ उत्पादों को समझौते की शुल्क कटौती व्यवस्था से बाहर रखा गया है।
भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग को इस समझौते से सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ब्रिटेन के बाजार में भारतीय कपड़ा उत्पादों पर पहले लगने वाले शुल्क के समाप्त होने से उनकी कीमत कम हो सकती है। इससे राजस्थान सहित देश के कपड़ा, हस्तशिल्प, आभूषण, चमड़ा और लघु उद्योगों को भी नए निर्यात ऑर्डर मिलने की संभावना है।
जयपुर के रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, ब्लॉक प्रिंटिंग, रेडीमेड वस्त्र, चमड़े के उत्पाद और घरेलू सजावटी सामान से जुड़े कारोबारियों के लिए भी ब्रिटेन का बाजार महत्वपूर्ण माना जाता है। शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने से राजस्थान के निर्यातकों को ब्रिटेन में अपने उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बेचने का अवसर मिल सकता है।
समझौते के पहले दिन निर्यातकों को डिजिटल माध्यम से मूल प्रमाणपत्र जारी किए गए। इसे सेल्फ सर्टिफिकेशन व्यवस्था से जोड़ा गया है, जिससे विशेष रूप से छोटे और मध्यम निर्यातकों के दस्तावेजी खर्च तथा समय में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि शुल्क रियायत का लाभ लेने के लिए कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उनका उत्पाद समझौते में निर्धारित मूल देश के नियमों को पूरा करता है।
भारत और ब्रिटेन के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार पहले से ही बड़े स्तर पर होता है। दोनों देशों का लक्ष्य इस समझौते के माध्यम से आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को तेजी से बढ़ाना है। ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार, समझौता लंबे समय में दोनों देशों के वार्षिक व्यापार में 25 अरब पाउंड से अधिक की वृद्धि कर सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समझौते का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि भारतीय कंपनियां ब्रिटेन के बाजार की मांग, गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग, पर्यावरण नियमों और मूल देश से संबंधित शर्तों को कितनी प्रभावी तरीके से पूरा करती हैं। सरकार ने निर्यात संवर्धन परिषदों और औद्योगिक संगठनों के साथ मिलकर कारोबारियों को समझौते के नियमों की जानकारी देने की तैयारी की है।
भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के लागू होने को वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इससे निर्यात बढ़ने के साथ उत्पादन, निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा भारतीय छोटे उद्योगों और पेशेवरों को दुनिया के प्रमुख बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने में सहायता मिलेगी।
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