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राजस्थान पुलिस का बड़ा कदम: बीट पुलिसिंग को मिलेगी हाई-टेक रफ्तार, नौ जिलों से होगी शुरुआत

राजस्थान पुलिस ने बीट पुलिसिंग को आधुनिक और तकनीक-आधारित बनाने के लिए बीपीएंडआरडी के साथ एमओयू किया है। पहले चरण में नौ जिलों में नई व्यवस्था लागू की जा रही है।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
राजस्थान पुलिस का बड़ा कदम: बीट पुलिसिंग को मिलेगी हाई-टेक रफ्तार, नौ जिलों से होगी शुरुआत

जयपुर। राजस्थान पुलिस ने अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। पुलिस मुख्यालय में राजस्थान पुलिस और गृह मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D) के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता डीजीपी/आईजीपी कांफ्रेंस 2025 की सिफारिशों के अनुरूप बीट स्तर की पुलिसिंग को सुदृढ़ करने के लिए तैयार एक वर्षीय एक्शन प्लान का हिस्सा है।

इस कार्यक्रम में राजस्थान पुलिस के महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा और BPR&D के महानिदेशक आलोक मित्तल की उपस्थिति में एमओयू को अंतिम रूप दिया गया। बीपीएंडआरडी के महानिदेशक आलोक मित्तल ने कहा कि पुलिसिंग में बीट सबसे बुनियादी इकाई है और इस एमओयू के माध्यम से राजस्थान पुलिस को विशेषज्ञ मार्गदर्शन और प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने राजस्थान पुलिस के बीट क्लस्टर कांसेप्ट की सराहना करते हुए इसे अन्य राज्यों के लिए भी एक अच्छा उदाहरण बताया।

महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि अब बीट पुलिसिंग परंपरागत कार्यों से हटकर तकनीक के सहयोग से धरातल पर बेहतर परिणाम देगी। इस नई व्यवस्था में बीट को जनसंख्या, अपराध की स्थिति और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर युक्तिसंगत बनाया जाएगा। साथ ही, संवेदनशील स्थानों और महत्वपूर्ण संस्थानों की पहचान कर जियो-मैप्ड बीट प्रोफाइल तैयार किए जाएंगे।

कार्ययोजना के प्रथम चरण में प्रदेश के नौ जिलों को चुना गया है, जिनमें सीकर, जयपुर उत्तर, धौलपुर, डीडवाना-कुचामन, कोटा शहर, डूंगरपुर, चूरू, जैसलमेर और जोधपुर पश्चिम शामिल हैं। इन जिलों के अनुभवों के आधार पर बाद में इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। तकनीक के प्रभावी उपयोग के लिए 'राजकॉप ई-बीट बुक' की क्षमताओं को और विकसित किया जाएगा, जिसमें जीपीएस, जियो-टैगिंग और क्यूआर आधारित सुविधाएं शामिल होंगी।

इस पहल का एक मुख्य उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करना भी है। पुलिस मित्र और कम्युनिटी लाइजन ग्रुप के माध्यम से आमजन के साथ संवाद को संस्थागत रूप दिया जाएगा। इसके अलावा, बीट पुलिसिंग की प्रभावशीलता की समीक्षा के लिए की-परफॉर्मेंस इंडिकेटर (KPI) आधारित व्यवस्था लागू की जाएगी। राजस्थान पुलिस अकादमी को नोडल प्रशिक्षण संस्थान बनाया गया है, जहां अधिकारियों को सॉफ्ट स्किल्स और नई तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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