भरतपुर-डीग निकाय चुनाव में कांग्रेस की करारी हार पर भड़के विश्वेंद्र सिंह, नेतृत्व पर उठाए गंभीर सवाल
भरतपुर और डीग नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस की शर्मनाक हार के बाद पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी नेतृत्व और जिलाध्यक्षों पर जमकर निशाना साधा है।

भरतपुर। भरतपुर और डीग जिलों में संपन्न हुए नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रहे गहरे असंतोष को सतह पर ला दिया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी की करारी हार के लिए सीधे तौर पर दोनों जिलों के जिलाध्यक्षों और प्रदेश नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन में कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर केवल चहेतों को टिकट बांटे गए, जिसका खामियाजा पार्टी को चुनावी नतीजों के रूप में भुगतना पड़ा है।
विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि भरतपुर और डीग में कांग्रेस की दुर्गति के लिए जिलाध्यक्ष दिनेश सूपा और राजीव चौधरी पूरी तरह से जवाबदेह हैं। उन्होंने दावा किया कि इन पदाधिकारियों ने समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया, जिससे जनता का भरोसा पार्टी से उठ गया। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता अब इन नेताओं और उन्हें संरक्षण देने वाले प्रदेश नेतृत्व को सबक सिखाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि पीसीसी चीफ मूक-बधिर बनकर बैठे हैं और विफल जिलाध्यक्षों को लगातार बचा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक ये दोनों जिलाध्यक्ष अपने पदों पर बने रहेंगे, तब तक इस क्षेत्र में कांग्रेस का पुनरुत्थान संभव नहीं है। उन्होंने प्रदेश नेतृत्व से मांग की कि वे तुरंत जमीनी हकीकत को समझें और संगठन में बड़े बदलाव करें।
मुख्यमंत्री के गृह जिले में पार्टी की इस स्थिति को उन्होंने बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि जहां पार्टी को सबसे मजबूत होना चाहिए था, वहां मनमानी और गलत नीतियों के कारण कांग्रेस गर्त में चली गई है। उन्होंने संगठन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि नेतृत्व को अब होश में आने की जरूरत है, अन्यथा पार्टी को और भी बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
गौरतलब है कि भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में हुए चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। पार्टी केवल 7 वार्डों पर सिमट गई, जबकि निर्दलीय प्रत्याशियों ने 36 वार्ड जीतकर अपना दबदबा बनाया है। भाजपा ने 20 वार्डों पर जीत दर्ज की है। इस शर्मनाक प्रदर्शन के बाद अब स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक बदलाव की मांग जोर पकड़ने लगी है।
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