जोधपुर में एजीटीएफ का बड़ा प्रहार: लॉरेंस-आरजू बिश्नोई गैंग के दो इनामी शूटर गिरफ्तार
राजस्थान पुलिस की एजीटीएफ और जोधपुर कमिश्नरेट ने 10 लाख के इनामी दो शार्प शूटरों को दबोचा, शहर में बड़ी रंगदारी की साजिश नाकाम।

जोधपुर। राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) और जोधपुर कमिश्नरेट पुलिस ने एक संयुक्त अभियान में लॉरेंस-आरजू बिश्नोई गैंग से जुड़े दो कुख्यात शार्प शूटरों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। इन दोनों आरोपियों पर पंजाब पुलिस ने पांच-पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। पुलिस की इस कार्रवाई से जोधपुर में किसी बड़े व्यापारी को निशाना बनाकर की जाने वाली रंगदारी की साजिश को समय रहते विफल कर दिया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जसकरण सिंह और राजिन्दर सिंह के रूप में हुई है, जो पंजाब के फाजिल्का और अबोहर क्षेत्र के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, ये दोनों आरोपी पंजाब में कपड़ा व्यापारी संजय वर्मा और साहिल सेन की हत्या सहित कई गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित थे। करीब डेढ़ साल पहले इन वारदातों को अंजाम देने के बाद ये नेपाल भाग गए थे। एजीटीएफ की टीम लगातार इनकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी और जैसे ही इनके राजस्थान में प्रवेश करने की सूचना मिली, पुलिस ने जाल बिछा दिया।
पुलिस को इनपुट मिला था कि ये दोनों आरोपी जोधपुर में किसी बड़े व्यापारी को धमकाकर करोड़ों रुपये की फिरौती वसूलने की योजना बना रहे हैं। कैलाश नगर स्थित होटल सनसिटी इन के कमरा नंबर 204 में दबिश देकर पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पहले फर्जी नाम बताकर टीम को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती बरतने पर उनकी असलियत सामने आ गई। तलाशी में उनके पास से एक अवैध रिवॉल्वर, 83 ग्राम अफीम और 88 हजार रुपये से अधिक की नकदी बरामद हुई है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, राजिन्दर सिंह के खिलाफ पंजाब में आठ और जसकरण सिंह के खिलाफ चार मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, हत्या का प्रयास, लूट और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। आरोपियों के पास से कूटरचित आधार कार्ड और अन्य संदिग्ध दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इनके पास हथियार और मादक पदार्थ कहां से आए और जोधपुर में इनके स्थानीय संपर्क कौन थे।
यह पूरी कार्रवाई एजीटीएफ और जोधपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में संपन्न हुई। पुलिस अब दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर उनके नेटवर्क और भविष्य की योजनाओं के बारे में गहन पूछताछ कर रही है। इस गिरफ्तारी को संगठित अपराध के खिलाफ राजस्थान पुलिस की एक बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है।
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