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सुमेरपुर: उज्ज्वला योजना के दावों के बीच फालु देवी का परिवार गैस कनेक्शन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर

पाली के सुमेरपुर में विधवा फालु देवी ने उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन के लिए दो बार आवेदन किया, लेकिन आज तक लाभ नहीं मिला। मजदूरी कर तीन बेटियों का पालन-पोषण कर रही फालु देवी बीपीएल सूची से भी बाहर हैं, जो सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाता है।

संवाददाता: जयपुर टाइम्स डेस्क
सुमेरपुर में गैस कनेक्शन के अभाव में संघर्ष कर रही विधवा फालु देवी और उनका परिवार
सुमेरपुर में गैस कनेक्शन के अभाव में संघर्ष कर रही विधवा फालु देवी और उनका परिवार

उज्ज्वला के दावों के बीच बुझा फालु देवी का चूल्हा, तीन बेटियों के भविष्य पर भी संकट

पति की मौत को पांच साल, दो बार आवेदन के बाद भी गैस कनेक्शन नहीं; मजदूरी कर बेटियों को पढ़ा रही मां, बीपीएल सूची से भी बाहर—सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल

सुमेरपुर/पोयणा। सरकार गरीब परिवारों को उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस उपलब्ध कराने और हर जरूरतमंद तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के दावे कर रही है, लेकिन पोयणा की विधवा फालु देवी का परिवार इन दावों की हकीकत पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। पति भगाराम मेघवाल की मौत को करीब पांच साल बीत चुके हैं। पीछे रह गई फालु देवी और उनकी तीन बेटियां—ममता (15), वर्षा (9) और धनुका (7)। मां मजदूरी कर परिवार चलाने और बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाने को मजबूर है। हैरानी यह है कि उज्ज्वला गैस कनेक्शन के लिए दो बार ऑनलाइन आवेदन करने के बावजूद आज तक कनेक्शन नहीं मिला।

दो आवेदन के बाद भी रसोई दूसरों के सिलेंडर पर

फालु देवी के अनुसार उन्होंने उज्ज्वला कनेक्शन के लिए दो बार ऑनलाइन आवेदन किया, लेकिन योजना का लाभ नहीं मिला। परिवार बीपीएल सूची में भी शामिल नहीं है। गैस कनेक्शन के अभाव में खाना बनाने के लिए दूसरों के सिलेंडर पर निर्भरता बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि दो बार किए गए आवेदन आखिर किस स्तर पर अटके और उनकी जांच अब तक क्यों नहीं हुई?

तीन बेटियों की जिम्मेदारी अकेली मां पर

पति की मौत के बाद तीन बेटियों की पूरी जिम्मेदारी फालु देवी के कंधों पर है। मजदूरी से घर चलाने के साथ वह बेटियों की पढ़ाई का खर्च भी उठा रही हैं। रहने की स्थिति भी बेहद साधारण है। पूर्व में कुछ भामाशाहों की मदद से खुले कमरों पर लोहे की चद्दर डलवाई गई थी। वर्तमान में तीन भाइयों के बीच बने छोटे से मकान में यह परिवार गुजर-बसर कर रहा है।

अब सवाल आवेदन का नहीं, जवाबदेही का

यह मामला महज गैस कनेक्शन तक सीमित नहीं है। यह सवाल है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद तक पहुंचाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? प्रशासन को दोनों ऑनलाइन आवेदनों की स्थिति की तत्काल जांच कर संबंधित गैस एजेंसी से रिपोर्ट लेनी चाहिए। साथ ही परिवार की पात्रता की जांच कर उज्ज्वला, खाद्य सुरक्षा/बीपीएल सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की दिशा में कार्रवाई करनी चाहिए।

जिम्मेदारों से सीधा सवाल

पांच साल से विधवा मां मजदूरी कर तीन बेटियों को पाल रही है। दो बार आवेदन के बाद भी गैस कनेक्शन नहीं मिला। ऐसे में क्या संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इस परिवार की सुध लेंगे या फिर सरकारी योजनाओं के दावे कागजों तक ही सीमित रहेंगे?

अब जरूरत आश्वासन की नहीं, मौके पर जांच और तत्काल कार्रवाई की है।

सुमेरपुर: उज्ज्वला योजना के दावों के बीच फालु देवी का परिवार गैस कनेक्शन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर

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