राजस्थान में नशा तस्करों पर पुलिस का बड़ा प्रहार: 20 दिनों में 1158 गिरफ्तार
मुख्यमंत्री के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस ने 9750 किलोग्राम से अधिक मादक पदार्थ जब्त किए हैं और बड़े नेटवर्क को तोड़ने में सफलता पाई है।

जयपुर, 11 अगस्त। राजस्थान को नशामुक्त बनाने के संकल्प के साथ प्रदेश पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ एक व्यापक अभियान छेड़ रखा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में 20 जुलाई से शुरू हुए इस एक माह के विशेष अभियान के शुरुआती 20 दिनों में ही पुलिस ने 1158 नशा तस्करों को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है। इस दौरान एनडीपीएस एक्ट के तहत 848 मामले दर्ज किए गए हैं, जो पुलिस की सख्त कार्रवाई को दर्शाते हैं।
अभियान के दौरान पुलिस ने 9750 किलोग्राम से अधिक मादक पदार्थ जब्त किए हैं, जिनमें डोडा पोस्त, अफीम, गांजा, स्मैक और हेरोइन जैसे घातक पदार्थ शामिल हैं। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में चल रही इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य केवल तस्करों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि नशे की सप्लाई चेन और तस्करी के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है। बीकानेर रेंज इस कार्रवाई में सबसे आगे रही है, जहाँ 273 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस की यह कार्रवाई केवल नशा तस्करी तक सीमित नहीं है। अभियान के दौरान 1624 हार्डकोर अपराधियों को भी गिरफ्तार किया गया है। साइबर अपराधों पर लगाम कसते हुए पुलिस ने 8 करोड़ 24 लाख रुपये से अधिक की राशि को होल्ड कराया है और पीड़ितों को लगभग 2 करोड़ 91 लाख रुपये वापस दिलाए हैं। इसके अतिरिक्त, अवैध खनन के खिलाफ भी 650 मामले दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की गई है।
सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन के लिए पुलिस ने प्रदेशभर में 9663 स्थानों पर नाकाबंदी की है। इस दौरान 7 लाख से अधिक वाहनों की जांच की गई और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 2 लाख 32 हजार से अधिक चालान किए गए। शराब पीकर वाहन चलाने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ पुलिस ने विशेष सख्ती बरती है।
पुलिस महानिदेशक ने स्पष्ट किया है कि संगठित अपराध और महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में पुलिस का यह रुख आगे भी जारी रहेगा। सामुदायिक पुलिसिंग को बढ़ावा देने के लिए 1060 सीएलजी बैठकें आयोजित की गई हैं, ताकि आमजन और पुलिस के बीच संवाद बढ़ सके। यह अभियान 20 अगस्त तक जारी रहेगा, जिसका लक्ष्य अपराधियों में कानून का भय पैदा करना और प्रदेशवासियों में सुरक्षा का विश्वास मजबूत करना है।
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